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नई प्रजाति : मौसम से लड़कर दोगुना उत्पादन देंगी धान-गेहूं की नई किस्में, 15 से 20 दिन कम समय में होंगी तैयार

Sat, 03 Aug 2024 03:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 03 Aug 2024 03:44 PM IST
सार

प्रयागराज में फसलों के उत्पादन पर मौसम का प्रभाव पड़ता है। यहां गर्मी में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस और जाड़े में तीन डिग्री से भी नीचे चला जाता है। इस कारण मौसम का उत्पादन और और समय प्रबंधन पर असर पड़ता है। फसल में एक पखवाड़े की देरी से फसलों में कीट लग जाते हैं और उत्पादन पर असर पड़ता है।

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New varieties of paddy and wheat will fight the weather and give double the production
गेहूं की नई किस्म से तैयार फसल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मौसम से लड़कर गेहूं और धान की नई प्रजातियां दोगुना उत्पादन देंगी। यह कमाल शुआट्स के वैज्ञानिकों ने किया है। शुआट्स के कृषि वैज्ञानिकों ने दो प्रजातियां विकसित करने में सफलता हासिल की हैं। इन फसलों के उत्पादन में एक पखवाड़े से लेकर 20 दिन का समय बचेगा।

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प्रयागराज में फसलों के उत्पादन पर मौसम का प्रभाव पड़ता है। यहां गर्मी में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस और जाड़े में तीन डिग्री से भी नीचे चला जाता है। इस कारण मौसम का उत्पादन और और समय प्रबंधन पर असर पड़ता है। फसल में एक पखवाड़े की देरी से फसलों में कीट लग जाते हैं और उत्पादन पर असर पड़ता है।

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इसी को देखते हुए शुआट्स में धान और गेहूं की नई किस्मों पर शोध चल रहा था। शोध निदेशक प्रो. एसडी मेकार्टी की देखरेख में कृषि वैज्ञानिक डॉ. महाबल राम और डॉ. रूपा लवानिया और डॉ. वीपी शाही ने गेहूं की नई किस्म एएआई डब्ल्यू-52 और सुआट्स धान-7 (सुहानी) विकसित की है।

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नई किस्मों की विशेषता

गेहूं प्रजनक वैज्ञानिक डॉ. वीपी शाही और धान प्रजनक डॉ. रूपा लवानिया ने बताया कि एएआई डब्ल्यू-52 किस्म कम सिंचाई के साथ देरी से बुवाई के लिए उपयुक्त है। इसके पौधे की ऊंचाई 95-98 सेमी है और यह 110-115 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। जबकि परंपरागत किस्में 115 से 130 दिन में तैयार होती हैं। इसकी औसत उपज 43.94 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि सामान्य गेहूं की उत्पादन क्षमता प्रति हेक्टेयर 23 से 26 क्विंटल के बीच होती है।

इसी तरह सुआट्स धान-7 (सुहानी) किस्म को सिंचित क्षेत्र में उगाया जा सकता है। इसके पौधे की ऊंचाई 85-95 सेमी है। यह किस्म 125-130 दिन में परिपक्व हो जाती है। जबकि अन्य परंपरागत किस्मों के तैयार होने का समय इससे करीब एक पखवाड़े तक अधिक लगता है। इसकी औसतन उपज 44.40 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि परंपरागत फसलें 22 क्विंटल तक ही उत्पादन देतीं हैं।

बीते वर्ष प्रयागराज में धान और गेहूं का उत्पादन
 

प्रयागराज जिले में बीते वर्ष 2.11 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी। इसमें 4.50 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ। जबकि धान की खेती 1.71 हेक्टेयर में की गई थी। इसमें 3.70 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ।
 

शुआट्स में तैयार दोनों नई किस्में प्रयागराज के मौसम को देखकर तैयार की गईं हैं। विपरीत मौसम में भी फसलें दोगुना उत्पादन देंगी। साथ ही इनके उत्पादन में समय भी कम खर्च होगा। - प्रो. एसडी मेकार्टी, निदेशक शोध, शुआट्स

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