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नई तकनीकी : आंख के सबलक्सेटेड लेंस में भी फेको विधि से हो सकेगी मोतियाबिंद की सर्जरी

Wed, 04 Oct 2023 01:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Oct 2023 01:52 PM IST
सार

यह कारनामा मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय (एमडीआई) के निदेशक व मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह ने किया है। इस शोध को पूरा करने में करीब दस वर्ष का समय लगा है। डॉ. सिंह की मानें तो इस प्रकार की सर्जरी काफी कठिन होती है।

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New technology: Cataract surgery can be done through phaco method even in subluxated lens of the eye
आंख का आपरेशन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब आंख के सबलक्सेटेड लेंस (लेंस का अपनी जगह से खिसकने की स्थिति) में फेको विधि से मोतियाबिंद की सर्जरी की जा सकेगी। आंखों की रोशनी खो चुके करीब 25 लोगों का इस विधि के द्वारा इलाज किया जा चुका है। इस सर्जरी का मॉडिफाइड टेक्निक ऑफ स्टेब्लाइजेशन ऑफ द कैप्सुलर बैग नाम रखा गया है।

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यह कारनामा मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय (एमडीआई) के निदेशक व मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह ने किया है। इस शोध को पूरा करने में करीब दस वर्ष का समय लगा है। डॉ. सिंह की मानें तो इस प्रकार की सर्जरी काफी कठिन होती है।
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आंख की पुतली में प्राकृतिक प्रोटीन लेंस होता है, जोकि चारों तरफ से एक झिल्ली से बंधा रहता है। किसी कारण वश या फिर दुर्घटना में यह लेंस पुतली से खिसक जाता है। इस प्रकार के लेंस को वापस पुतली में लाकर फेको विधि से मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है और उस खिसके हुए लेंस को हटाकर नए लेंस को मेम्ब्रेन में सेट किया जाता है।
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इसका शोध पत्र इंटरनेशनल जनरल ऑफ ऑप्थैल्मिक पैथोलॉजी में प्रकाशित भी हो चुका है। इस प्रकार के नए प्रयोग से लोगों में रोशनी जाने का खतरा और अन्य प्रकार की समस्या समाप्त हो जाती है। हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. एसपी सिंह ने अपने इस शोध को प्रस्तुत किया।

29 आंखों में सबलक्सेटेड मोतियाबिंद की हुई सर्जरी

सबलक्सेटेड मोतियाबिंद की सर्जरी 29 आंखों में की गई। जिन्हें संशोधित तकनीकों के साथ एंडोकैप्सुलर रिंग प्रत्यारोपित की गई। जिसके बाद कैप्सुलर बैग में फेकोइमल्सीफिकेशन और इंट्राऑक्यूलर लेंस (आईओएल) का प्रत्यारोपण किया गया। इसके बाद डैमेज (क्षतिग्रस्त) लेंस को बिना किसी परेशानी के वापस मेम्ब्रेन में लाकर मोतियाबिंद की सर्जरी की गई।

इस विधि से सर्जरी करना काफी जटिल था। क्योंकि अन्य किसी हिस्से को बिना नुकसान पहुंचाए लेंस को अपने स्थान पर स्थिर करना और फिर लेंस को निकालकर दूसरा लेंस उसी स्थान पर लगाया जाए, यह एक खास तकनीक है। इस शोध के लिए अपने सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट करता हूं। - डॉ. एसपी सिंह, निदेशक, मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय, प्रयागराज

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