UPPSC : दस साल पुराने विवाद में फंसी 3446 पदों पर नई भर्ती, आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यूपीपीएससी ने दो बार डाटा भेजा, लेकिन यूपीएसएसएससी ने यह कहकर विज्ञापन रोके रखा कि डाटा निर्धारित प्रारूप में नहीं है। यूपीपीएससी ने तीसरी बार डाटा की प्रमाणित हार्डकाॅपी यूपीएसएसएससी को भेज दी। तीसरी बार डाटा स्वीकार कर लिया गया, लेकिन इसके बाद भी यूपीएसएसएससी ने विज्ञापन जारी नहीं किया।
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कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती-2013 के विवाद में नई भर्ती महीनों से फंसी हुई है। इसका विज्ञापन भी तैयार है, लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के बीच डाटा के लेनदेन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण विज्ञापन अटका हुआ है।
लापरवाही यूपीएसएसएससी के स्तर पर हुई। यूपीएसएसएससी ने पहले यूपीपीएससी से 2013 की भर्ती में शामिल हुए उन 906 अभ्यर्थियों का डाटा मांगा था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में ही ओवरएज हो चुके इन 906 अभ्यर्थियों को नई भर्ती में शामिल किया जाना है।
यूपीपीएससी ने दो बार डाटा भेजा, लेकिन यूपीएसएसएससी ने यह कहकर विज्ञापन रोके रखा कि डाटा निर्धारित प्रारूप में नहीं है। यूपीपीएससी ने तीसरी बार डाटा की प्रमाणित हार्डकाॅपी यूपीएसएसएससी को भेज दी। तीसरी बार डाटा स्वीकार कर लिया गया, लेकिन इसके बाद भी यूपीएसएसएससी ने विज्ञापन जारी नहीं किया।
अभ्यर्थी जब यूपीएसएसएससी पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि अब उन डेढ़ सौ अभ्यर्थियों का डाटा भी यूपीपीएससी से लेना पड़ेगा, जो पुरानी भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई याचिका में प्रतिवादी थे। ऐसे ओवरएज अभ्यर्थियों को भी नई भर्ती में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। अब सवाल उठ रहे हैं कि यूपीएसएसएससी ने जब 906 अभ्यर्थियों का डाटा मांगा था तो प्रतिवादी रहे अन्य डेढ़ सौ अभ्यर्थियों को क्यों छोड़ दिया।
अब इन डेढ़ सौ अभ्यर्थियों के डाटा के लेनदेन को लेकर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है। अभ्यर्थियों को यूपीएसएसएससी के अफसरों ने बताया कि डेढ़ सौ अभ्यर्थियों का डाटा लेने के लिए यूपीपीएससी को पत्र भेज दिया गया है, एक सप्ताह में यूपीपीएससी को पत्र मिल जाएगा और वहां से डाटा प्राप्त होने के तीन दिन के बाद कृषि प्राविधिक सहायक के 3446 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर भर्ती शुरू कराने की मांग
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि पहले यह भर्ती यूपीपीएससी के माध्यम से होती थी, लेकिन इस बार यूपीएसएसएससी को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यूपीपीएससी की जितनी भर्तियां यूपीएसएसएसी को सौंपी गई हैं, वे सभी फंसी हुई हैं। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की गई है कि कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती पूर्व की भांति यूपीपीएससी कराए या यूपीएसएसएससी एक सप्ताह के भीतर नई भर्ती का विज्ञापन जारी करे।