ज्ञानवापी मस्जिद : मुस्लिम पक्ष ने कहा- मंदिर पक्ष का तीन तारीखों पर पूजा रोकने का दावा खारिज करने योग्य
अंजुमने इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ सुनवाई कर रही है। मामले में हिंदू महिलाओं की ओर से दाखिल सिविल वाद की ग्राह्यता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त करने के जिला जज के आदेश को चुनौती दी गई है।
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ज्ञानवापी परिसर, वाराणसी स्थित शृंगार गौरी में नियमित पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत के फैसले की चुनौती याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई जारी रही। अंजुमने इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से मंदिर पक्ष के दावे को सही नहीं बताया गया। एक घंटे तक हुई बहस सुनने के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया है।
अंजुमने इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ सुनवाई कर रही है। मामले में हिंदू महिलाओं की ओर से दाखिल सिविल वाद की ग्राह्यता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त करने के जिला जज के आदेश को चुनौती दी गई है। मामले में याची पक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एसएफए नकवी ने तर्क दिया कि मंदिर पक्ष की ओर से शृंगार गौरी की पूजा रोकने के लिए तीन तिथियां बताई गईं हैं। इसके तहत पहली तिथि 1990, दूसरी 1993 और इसी तरह तीसरी तिथि 2021 बताई गई है जब शृंगार गौरी की नियमित पूजा रोकी गई हे।
तर्क दिया कि मंदिर पक्ष के इसी तर्क पर ही दावा खारिज हो जाना चाहिए था लेकिन, निचली अदालत ने इसका सही तरह से आकलन नहीं किया। नियमित पूजा की मांग को स्वीकार करते हुए इंतजामिया मसाजिद कमेटी की अर्जी को खारिज कर दिया। अधिवक्ता ने याचिका में मंदिर पक्ष की ओर से दिए गए तर्कों में कई विसंगतियों पर अपना पक्ष रखा।
इसके पूर्व सुनवाई की शुरुआत में इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने जिला अदालत के फैसले को कोर्ट के सामने रखा। बताया कि शृंगार गौरी की पूजा नियमित तौर पर पहले से ही बंद है। मंदिर पक्ष ने इसके पहले नियमित पूजा करने का कभी दावा नहीं किया। उसका दावा आज का है। करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी।
मामले में वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर के आदेश से हिंदू पक्ष की महिलाओं की ओर से शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर मुकद्दमे की सुनवाई का आदेश दिया है, जिसे चुनौती दी गई है।