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हाईकोर्ट ने कहा : भावावेश में हुई हत्या को इरादतन हत्या का नहीं दिया जा सकता रंग, रिहा करने का आदेश

Sat, 25 Mar 2023 08:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 25 Mar 2023 08:46 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भावावेश में हुई हत्या को इरादतन हत्या का रंग नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने हत्या के मामले में गाजियाबाद जिला अदालत द्वारा याची के आजीवन कारावास की सजा को परिवर्तित करते हुए 10 साल कर दिया।

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murder in passion cannot be given the color of intentional murder, ordered to release
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भावावेश में हुई हत्या को इरादतन हत्या का रंग नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने हत्या के मामले में गाजियाबाद जिला अदालत द्वारा याची के आजीवन कारावास की सजा को परिवर्तित करते हुए 10 साल कर दिया। याची पर किसी अन्य आपराधिक मामला न होने पर जेल से रिहा करने का आदेश पारित किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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याची पर आरोप है कि उसने अवधेश नामक युवक के साथ अपनी पुत्री को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। वह भावावेश में आकर उसकी हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई कर याची को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। याची ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के खिलाफ हत्या करने का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। परिस्थितियों के आधार पर उसे दोषी माना गया है।

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इससे यह तय है कि उसने हत्या कोई योजनाबद्ध तरीके से नहीं की है। लिहाजा, याची का इरादा हत्या करने का नहीं है। वह भावावेश में आकर आत्म नियंत्रण खो दिया। लिहाजा, उसे आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने याची को आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा को परिवर्तित करते हुए उसे 10 साल कर दिया और जुर्माने की रकम 40 हजार रुपये ही रखी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि याची 10 साल की सजा काट चुका है। अगर वह जुर्माने की रकम नहीं जमा करता है तो उसे एक साल की सजा भुगतनी होगी। अगर, उसके खिलाफ कोई और आपराधिक मामला नहीं है तो उसे जेल से तुरंत रिहा किया जाए।

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