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मातमी सदाओं के बीच फिज़ा में फैला रंजो-गम
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Muharram Chehellum news
- फोटो : CITY DESK
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बारी-बारी से निकाले गए बहत्तर शबीहे ताबूत, बोसा लेने को मची होड़
पहली बार दरियाबाद कब्रिस्तान में दफनाए गए सभी बहत्तर शबीहेताबूत
प्रयागराज। दसवीं मुहर्रम और चेहल्लुम के बाद बुधवार को बहत्तर ताबूत जुलूस के दौरान एक बार फिर शहर की फिजां में रंजो-ग़म बरपा रहा। तमाम रास्ते दरियाबाद की ओर मुड़े। इमामबाड़ा जदद्न मीर साहब से लेकर कब्रिस्तान तक अजादारों के हुजूम के बीच गम की स्याह चादर तनी तो फिज़ा में या अली, या हुसैन की मातमी सदाएं भी गूंजती रहीं। मांओं की गोद में रहे बच्चों से लेकर बड़ी संख्या में युवतियां, महिलाएं, बुजुर्ग और सीनाजनी, मातम के साथ युवा भी गमे हुसैन में शरीक हुए।
सैयदवाड़ा, पीपल चौराहा, दरियाबाद कब्रिस्तान से होकर दरगाह इमाम हुसैन के पश्चिम में बनाए गए गहरे गड़्ढ़े में शबीहे ताबूतों को दफन किया गया। मौलाना सैयद रज़ी हैदर ने मजमें को दुआंए पढ़ाईं। मास्टर गजनफर अली साखनी बुलन्दशहर ने मुनादिए बशीर का मंजर पेश किया। मौलाना शाहिद रज़ा शमूल ने दर्दअंगेज़ तकरीर की। मंज़र अल हिन्दी ने सोजख्वानी की। ज़रखेज़ नजीब ने हजारों सोगवारों को खिताब किया। मौलाना सैयद इंतेज़ार आब्दी ने हर जांबाज की बहादुरी और शहादत बयां की।
इस दौरान अकीदतमंदों ने शबीहे ताबूतों पर फूल-मालाएं व सूती कपड़े की चादरें चढ़ाकर मन्नत व दुआएं मांगी। दरियाबाद के रौनक सफीपुरी, मंजर नकवी, बाकर नवकी, रानीमंडी के सनोबर रिजवी, दरियाबाद की ही अबीहा, फरहा, रुखसार रिज़वी और कौशाम्बी की इंतेखाब फातिमी बोलीं, हमने ताबूतों का बोसा लेकर मन्नत मुरादें मांगीं। दिवंगत पार्षद एहतेशाम रिज़वी के लिए भी सूरए फातिहा पढ़वाया गया।
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अंजुमन के अध्यक्ष सैयद रज़ा हसनैन एडवोकेट, उपाध्यक्ष एवं मीडिया निदेशक हाजी सैयद अज़ादार हुसैन, सचिव बशारत हुसैन, असरार नियाजी, रौनक सफीपुरी, अहमद अब्बास अस्करी, शजर, ज़ैन, मुताहिर रज़ा, ताहिर रज़ा, मो. नासिर जै़दी आदि ने व्यवस्था संभाली। जुलूस में बड़ा ताजिया, बुड्ढ़ा ताजिया, ऐतिहासिक मोहर्रम कमेटी, झूला कमेटी आदि के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नजीब इलाहाबादी ने पूरे कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया।
‘गंजे शहीदा’ की तर्ज पर दफनाए गए ताबूत
दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा जदद्न मीर साहब से अकीदत और एहतराम के साथ एक-एक करके करबला के सभी बहत्तर शहीदों के शबीहे ताबूत निकले। अब तक सिर्फ चार बड़े शबीहे ताबूतों को ही दफनाने के लिए लाया जाता था। इस बार उन चार बड़े सहित बाकी 68 शबीहे ताबूतों को भी करबला में ‘गंजे शहीदा’ (सामूहिक रूप से दफनाना) की तर्ज पर दफनाया गया। वहीं इमामबाड़े के सामने एक फ्रेम पर बहत्तर अलम भी रखे गए। इस मंजर को देखने के लिए हर कोई बेताब रहा।
काफिला-ए-बनी असद की मंजरकशी गज़ब रही
अंजुमने हैदरी महमूदाबाद स्टेट सीतापुर की ओर से काफिला-ए-बनी असद की मंजरकशी गज़ब रही। अंजुमन नक़विया रजिस्टर्ड की ओर से नौहे पढ़कर यादे सकीना का मंजर पेश किया गया। ईरानी व बलूची मूल की महिलाओं की ओर से अपने खास अंदाज में पश्तो, पंजाबी, सिंधी तथा फारसी में नौहों के साथ खिराजे अकीदत पेश किया। अजादारों ने जंजीर व छोटी तलवार के मातम से खुद को लहू-लुहान किया। मौलाना सैयद रज़ी हैदर ने दरियाबाद कब्रिस्तान में बनाए गए मंच से बीबी सकीना के साथ हुए ज़ुल्म को बयां किया।
पड़ोसी जिलों सहित पूरे देश भर से आए जायरीन
बहत्तर जुलूस में शिरकत करने के लिए प्रयागराज के शहरी और दूरदराज के गांवों ही नहीं कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर आदि जिलों से भीअकीदतमंद जुटे। मेरठ के सैयद अली हैदर रिजवी और तारिक अब्बास बोले, बीते वर्ष आया था, सो इस वर्ष भी आने का कार्यक्रम काफी पहले से बना लिया था। पड़रौना से आए गुलरेज अली बोले, यहां जलसे में शरीक होना किसी जियारत से कम नहीं है।
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देश भर की अंजुमनें हुईं शामिल
अंजुमनों गुंचए कासिमिया बख्शी बाज़ार, मुहाफिज़े अज़ा कदीम, हुसैनिया रजिस्टर्ड (दरियाबाद), अंजुमन हैदरी महमूदाबाद स्टेट साहबे बयाज़ मज़हर हुसैन, अंजुमन हैदरी रजिस्टर्ड, सेथल बरेली, अंजुमन अतफाले हुसैनी करारी, कौशांबी (साहबे बयाज़ हीरा भाई रिज़वी व नज़फी रिज़वी), असगरिया कदीम मंझनपुर ने नौहाख्वानी की।
अहले सुन्नतवल जमाअत की अंजुमन जाफरिया जैनबिया महगांव के साथ अंजुमन जवानाने हुसैन, अमीलो, आज़मगढ़ ने अपने खास अंदाज में नौहाखानी व सीनाजनी करके हाजिरी लगाई। गुलाम अब्बास और डॉ.नायाब बलियावी ने दर्दभरे नौहों से सभी की आंखें अश्कबार कीं। साहबे बयाज़, अमन दरियाबादी को सुनने लोग उमड़े। सिकन्दर इलाहाबादी ने मुल्क व कौम की सलामती के लिए दुआएं पढीं।
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लगे लंगर, सबीले इमाम हुसैन
जुलूस के दौरान अकीदतमंदों के लिए अनेक संगठनों की ओर से सबीले इमाम हुसैन के साथ ही खाने-पीने की तमाम चीजों के लंगर लगाए गए। चाय, काफी, तंदूरी रोटी, दाल-चावल, छोटे बच्चों के लिए दूध तथा मज़हबी लिटरेचर नि:शुल्क बांटे गए।
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सिविल डिफेंस ने संभाली व्यवस्था
नागरिक सुरक्षा संगठन के पदाधिकारी पूर्व प्रधानाचार्य जफर अब्बास, ज़ायर हुसैन कुंवरजी, वकार अहमद चन्दा, सिकन्दर अली, मो. आलम चांद, गमखार हुसैन, जव्वार आब्दी, हैदर कमाल रिज़वी, ज़फर अब्बास, शाहिद काज़मी आदि ने जायरीन की मदद की।
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शिया डायरेक्टरी के लिए हजार
से ज्यादा लोगों ने भरे फार्म
प्रयागराज। बहत्तर ताबूत कमेटी की पहल पर तैयार कराई जा रही शिया मोबाइल डायरेक्टरी के लिए मौके पर भी लोगों ने स्लिप पर अपनी सूचनाएं दर्ज कराईं। हाजी सैयद अज़ादार हुसैन नकवी की देखरेख में हुए कार्यक्रम के दौरान हजार से ज्यादा लोगों ने अपना विवरण भरा। उम्मीद है कि 26 जनवरी तक डायरेक्टरी आ जाएगी।
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पहली बार दरियाबाद कब्रिस्तान में दफनाए गए सभी बहत्तर शबीहेताबूत
प्रयागराज। दसवीं मुहर्रम और चेहल्लुम के बाद बुधवार को बहत्तर ताबूत जुलूस के दौरान एक बार फिर शहर की फिजां में रंजो-ग़म बरपा रहा। तमाम रास्ते दरियाबाद की ओर मुड़े। इमामबाड़ा जदद्न मीर साहब से लेकर कब्रिस्तान तक अजादारों के हुजूम के बीच गम की स्याह चादर तनी तो फिज़ा में या अली, या हुसैन की मातमी सदाएं भी गूंजती रहीं। मांओं की गोद में रहे बच्चों से लेकर बड़ी संख्या में युवतियां, महिलाएं, बुजुर्ग और सीनाजनी, मातम के साथ युवा भी गमे हुसैन में शरीक हुए।
सैयदवाड़ा, पीपल चौराहा, दरियाबाद कब्रिस्तान से होकर दरगाह इमाम हुसैन के पश्चिम में बनाए गए गहरे गड़्ढ़े में शबीहे ताबूतों को दफन किया गया। मौलाना सैयद रज़ी हैदर ने मजमें को दुआंए पढ़ाईं। मास्टर गजनफर अली साखनी बुलन्दशहर ने मुनादिए बशीर का मंजर पेश किया। मौलाना शाहिद रज़ा शमूल ने दर्दअंगेज़ तकरीर की। मंज़र अल हिन्दी ने सोजख्वानी की। ज़रखेज़ नजीब ने हजारों सोगवारों को खिताब किया। मौलाना सैयद इंतेज़ार आब्दी ने हर जांबाज की बहादुरी और शहादत बयां की।
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इस दौरान अकीदतमंदों ने शबीहे ताबूतों पर फूल-मालाएं व सूती कपड़े की चादरें चढ़ाकर मन्नत व दुआएं मांगी। दरियाबाद के रौनक सफीपुरी, मंजर नकवी, बाकर नवकी, रानीमंडी के सनोबर रिजवी, दरियाबाद की ही अबीहा, फरहा, रुखसार रिज़वी और कौशाम्बी की इंतेखाब फातिमी बोलीं, हमने ताबूतों का बोसा लेकर मन्नत मुरादें मांगीं। दिवंगत पार्षद एहतेशाम रिज़वी के लिए भी सूरए फातिहा पढ़वाया गया।
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अंजुमन के अध्यक्ष सैयद रज़ा हसनैन एडवोकेट, उपाध्यक्ष एवं मीडिया निदेशक हाजी सैयद अज़ादार हुसैन, सचिव बशारत हुसैन, असरार नियाजी, रौनक सफीपुरी, अहमद अब्बास अस्करी, शजर, ज़ैन, मुताहिर रज़ा, ताहिर रज़ा, मो. नासिर जै़दी आदि ने व्यवस्था संभाली। जुलूस में बड़ा ताजिया, बुड्ढ़ा ताजिया, ऐतिहासिक मोहर्रम कमेटी, झूला कमेटी आदि के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नजीब इलाहाबादी ने पूरे कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया।
‘गंजे शहीदा’ की तर्ज पर दफनाए गए ताबूत
दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा जदद्न मीर साहब से अकीदत और एहतराम के साथ एक-एक करके करबला के सभी बहत्तर शहीदों के शबीहे ताबूत निकले। अब तक सिर्फ चार बड़े शबीहे ताबूतों को ही दफनाने के लिए लाया जाता था। इस बार उन चार बड़े सहित बाकी 68 शबीहे ताबूतों को भी करबला में ‘गंजे शहीदा’ (सामूहिक रूप से दफनाना) की तर्ज पर दफनाया गया। वहीं इमामबाड़े के सामने एक फ्रेम पर बहत्तर अलम भी रखे गए। इस मंजर को देखने के लिए हर कोई बेताब रहा।
काफिला-ए-बनी असद की मंजरकशी गज़ब रही
अंजुमने हैदरी महमूदाबाद स्टेट सीतापुर की ओर से काफिला-ए-बनी असद की मंजरकशी गज़ब रही। अंजुमन नक़विया रजिस्टर्ड की ओर से नौहे पढ़कर यादे सकीना का मंजर पेश किया गया। ईरानी व बलूची मूल की महिलाओं की ओर से अपने खास अंदाज में पश्तो, पंजाबी, सिंधी तथा फारसी में नौहों के साथ खिराजे अकीदत पेश किया। अजादारों ने जंजीर व छोटी तलवार के मातम से खुद को लहू-लुहान किया। मौलाना सैयद रज़ी हैदर ने दरियाबाद कब्रिस्तान में बनाए गए मंच से बीबी सकीना के साथ हुए ज़ुल्म को बयां किया।
पड़ोसी जिलों सहित पूरे देश भर से आए जायरीन
बहत्तर जुलूस में शिरकत करने के लिए प्रयागराज के शहरी और दूरदराज के गांवों ही नहीं कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर आदि जिलों से भीअकीदतमंद जुटे। मेरठ के सैयद अली हैदर रिजवी और तारिक अब्बास बोले, बीते वर्ष आया था, सो इस वर्ष भी आने का कार्यक्रम काफी पहले से बना लिया था। पड़रौना से आए गुलरेज अली बोले, यहां जलसे में शरीक होना किसी जियारत से कम नहीं है।
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देश भर की अंजुमनें हुईं शामिल
अंजुमनों गुंचए कासिमिया बख्शी बाज़ार, मुहाफिज़े अज़ा कदीम, हुसैनिया रजिस्टर्ड (दरियाबाद), अंजुमन हैदरी महमूदाबाद स्टेट साहबे बयाज़ मज़हर हुसैन, अंजुमन हैदरी रजिस्टर्ड, सेथल बरेली, अंजुमन अतफाले हुसैनी करारी, कौशांबी (साहबे बयाज़ हीरा भाई रिज़वी व नज़फी रिज़वी), असगरिया कदीम मंझनपुर ने नौहाख्वानी की।
अहले सुन्नतवल जमाअत की अंजुमन जाफरिया जैनबिया महगांव के साथ अंजुमन जवानाने हुसैन, अमीलो, आज़मगढ़ ने अपने खास अंदाज में नौहाखानी व सीनाजनी करके हाजिरी लगाई। गुलाम अब्बास और डॉ.नायाब बलियावी ने दर्दभरे नौहों से सभी की आंखें अश्कबार कीं। साहबे बयाज़, अमन दरियाबादी को सुनने लोग उमड़े। सिकन्दर इलाहाबादी ने मुल्क व कौम की सलामती के लिए दुआएं पढीं।
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लगे लंगर, सबीले इमाम हुसैन
जुलूस के दौरान अकीदतमंदों के लिए अनेक संगठनों की ओर से सबीले इमाम हुसैन के साथ ही खाने-पीने की तमाम चीजों के लंगर लगाए गए। चाय, काफी, तंदूरी रोटी, दाल-चावल, छोटे बच्चों के लिए दूध तथा मज़हबी लिटरेचर नि:शुल्क बांटे गए।
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सिविल डिफेंस ने संभाली व्यवस्था
नागरिक सुरक्षा संगठन के पदाधिकारी पूर्व प्रधानाचार्य जफर अब्बास, ज़ायर हुसैन कुंवरजी, वकार अहमद चन्दा, सिकन्दर अली, मो. आलम चांद, गमखार हुसैन, जव्वार आब्दी, हैदर कमाल रिज़वी, ज़फर अब्बास, शाहिद काज़मी आदि ने जायरीन की मदद की।
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शिया डायरेक्टरी के लिए हजार
से ज्यादा लोगों ने भरे फार्म
प्रयागराज। बहत्तर ताबूत कमेटी की पहल पर तैयार कराई जा रही शिया मोबाइल डायरेक्टरी के लिए मौके पर भी लोगों ने स्लिप पर अपनी सूचनाएं दर्ज कराईं। हाजी सैयद अज़ादार हुसैन नकवी की देखरेख में हुए कार्यक्रम के दौरान हजार से ज्यादा लोगों ने अपना विवरण भरा। उम्मीद है कि 26 जनवरी तक डायरेक्टरी आ जाएगी।

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