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आधे से अधिक अभ्यर्थियों ने छोड़ी बीईओ परीक्षा
Mon, 17 Aug 2020 01:56 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 17 Aug 2020 01:56 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण का असर रविवार को आयोजित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ)-2019 की प्रारंभिक परीक्षा पर भी दिखा। अभ्यर्थियों की उपस्थिति काफी कम रही। आधे से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। बीईओ के 309 पदों के लिए पांच लाख 28 हजार 314 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे और इनमें से दो लाख 33 हजार 393 यानी 44.18 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।
परीक्षा के लिए प्रदेश के 18 जनपदों में 1127 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा दोपहर 12 से दो बजे की पाली में आयोजित की गई। ज्यादातर अभ्यर्थियों के सेंटर दूसरे जिलों में थे। हालांकि, इस परीक्षा के कारण रविवार को लॉकडाउन में तमाम तरह की छूट दी गई थी, ताकि परीक्षार्थियों को दिक्कत न हो। इसके बावजूद परीक्षार्थियों की उपस्थिति संतोषजनक नहीं रही।
परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के लिए मास्क पहनकर आना अनिवार्य था। उन्हें अपने साथ हैंड सैनिटाइजर और पीने के पानी की बोतल भी रखने को कहा गया था। अभ्यर्थियों ने दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया। परीक्षा केंद्रों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया। परीक्षा नकल न हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
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परीक्षा देने वाराणसी, आजमगढ़ एवं अन्य जिलों से यहां अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए निजी वाहन बुक करा रखे थे। बहुत से अभ्यर्थी कोरोना के कारण बस या ट्रेन से सफर करने को तैयार नहीं थे, जो निजी वाहन से आने में समक्ष नहीं थे, उनमें से कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
बीईओ की परीक्षा कई वर्षों बाद आयोजित की गई है और अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा काफी महत्वपूर्ण थी। यही वजह थी कि अभ्यर्थियेां ने परीक्षा स्थगित कराने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। यहां तक कि अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट भी गए। अभ्यर्थी मांग कर रहे थे कि कोविड-19 का प्रभाव कम होने के बाद परीक्षा कराई जाए। पहले यह परीक्षा 22 मार्च को प्रस्तावित थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण स्थगित कर दी गई थी।
आजमगढ़ में सर्वाधिक उपस्थित, प्रयागराज दूसरे नंबर पर
- प्रदेश के 18 जिलों में आयोजित बीईओ की प्रारंभिक परीक्षा में कुल उपस्थिति भले ही संतोजषनक न रही हो, लेकिन आजमगढ़ में आधे से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। वहां 57 फीसदी उपस्थित रही। वहीं, उपस्थिति के मामले में प्रयागराज दूसरे नंबर पर रहा। प्रयागराज में 106 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे और परीक्षा के लिए 48900 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 25773 यानी 52.71 फीसदी परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
बीआई परीक्षा पहले 22 मार्च को प्रस्तावित था। इसके पेपर छह माह पहले ही छप चुके थे और ट्रेजरी में सुरक्षित रखवा दिए गए थे। 22 मार्च की परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र भी जारी कर दिए गए थे। लेकिन, लॉकडाउन के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत करेंट अफेयर्स पर की थी। इसके लिए समाचारपत्रों और मासिक एवं साप्ताहिक पत्रिकाओं का नियमित रूप से अध्ययन कर रहे थे। लेकिन, पेपर में पिछले पांच-छह माह के घटनाक्रम से जुड़ा कोई नहीं आया। यहां तक कि कोविड-19 से संबंधित कोई सवाल नहीं पूछा गया।
पेपर में सबसे अधिक सवाल सुमेलित करने वाले थे, जिन्हें हल करने में वक्त लगता है। दो घंटे में 120 सवाल हल करने थे और पेपर कुल 300 अंकों का था। माइनस मार्किंग भी थी। सुमेलित करने वाले सवालों ने अभ्यर्थियों को काफी छकाया। वहीं, रीजनिंग के सवालों में भी अभ्यर्थियों को माथापच्ची करनी पड़ी। माइनस मार्किंग के कारण हर सवाल का काफी सोच-समझकर जवाब देना था, ऐसे में पेपर हल करने के लिए जितना वक्त मिला, वह कम लगा। परीक्षा में भारतीय संविधान और जनगणना से जुड़े सवाल भी आए। लेकिन ऐसे सवालों की संख्या काफी कम रही।
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परीक्षा के लिए प्रदेश के 18 जनपदों में 1127 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा दोपहर 12 से दो बजे की पाली में आयोजित की गई। ज्यादातर अभ्यर्थियों के सेंटर दूसरे जिलों में थे। हालांकि, इस परीक्षा के कारण रविवार को लॉकडाउन में तमाम तरह की छूट दी गई थी, ताकि परीक्षार्थियों को दिक्कत न हो। इसके बावजूद परीक्षार्थियों की उपस्थिति संतोषजनक नहीं रही।
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परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के लिए मास्क पहनकर आना अनिवार्य था। उन्हें अपने साथ हैंड सैनिटाइजर और पीने के पानी की बोतल भी रखने को कहा गया था। अभ्यर्थियों ने दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया। परीक्षा केंद्रों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया। परीक्षा नकल न हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
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परीक्षा देने वाराणसी, आजमगढ़ एवं अन्य जिलों से यहां अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए निजी वाहन बुक करा रखे थे। बहुत से अभ्यर्थी कोरोना के कारण बस या ट्रेन से सफर करने को तैयार नहीं थे, जो निजी वाहन से आने में समक्ष नहीं थे, उनमें से कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
बीईओ की परीक्षा कई वर्षों बाद आयोजित की गई है और अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा काफी महत्वपूर्ण थी। यही वजह थी कि अभ्यर्थियेां ने परीक्षा स्थगित कराने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। यहां तक कि अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट भी गए। अभ्यर्थी मांग कर रहे थे कि कोविड-19 का प्रभाव कम होने के बाद परीक्षा कराई जाए। पहले यह परीक्षा 22 मार्च को प्रस्तावित थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण स्थगित कर दी गई थी।
आजमगढ़ में सर्वाधिक उपस्थित, प्रयागराज दूसरे नंबर पर
- प्रदेश के 18 जिलों में आयोजित बीईओ की प्रारंभिक परीक्षा में कुल उपस्थिति भले ही संतोजषनक न रही हो, लेकिन आजमगढ़ में आधे से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। वहां 57 फीसदी उपस्थित रही। वहीं, उपस्थिति के मामले में प्रयागराज दूसरे नंबर पर रहा। प्रयागराज में 106 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे और परीक्षा के लिए 48900 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 25773 यानी 52.71 फीसदी परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
काम नहीं आई करेंट अफेयर्स की तैयारी
प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी अमूमन करेंट अफेयर्स की तैयारी पर ज्यादा जोर देते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ)-2019 की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी यही हुआ, लेकिन इस बार करेंट अफेयर्स को लेकर की गई परीक्षा की तैयारी काम नहीं आई। बीईओ की परीक्षा का पेपर छह माह पुराना था, जिसमें रीजनिंग और सुमेलित करने वाले सवालों की भरमार रही। हालांकि, पेपर स्तरीय था और संतुलित था, लेकिन ट्रेंड से हटकर पूछे गए सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझा दिया।बीआई परीक्षा पहले 22 मार्च को प्रस्तावित था। इसके पेपर छह माह पहले ही छप चुके थे और ट्रेजरी में सुरक्षित रखवा दिए गए थे। 22 मार्च की परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र भी जारी कर दिए गए थे। लेकिन, लॉकडाउन के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत करेंट अफेयर्स पर की थी। इसके लिए समाचारपत्रों और मासिक एवं साप्ताहिक पत्रिकाओं का नियमित रूप से अध्ययन कर रहे थे। लेकिन, पेपर में पिछले पांच-छह माह के घटनाक्रम से जुड़ा कोई नहीं आया। यहां तक कि कोविड-19 से संबंधित कोई सवाल नहीं पूछा गया।
पेपर में सबसे अधिक सवाल सुमेलित करने वाले थे, जिन्हें हल करने में वक्त लगता है। दो घंटे में 120 सवाल हल करने थे और पेपर कुल 300 अंकों का था। माइनस मार्किंग भी थी। सुमेलित करने वाले सवालों ने अभ्यर्थियों को काफी छकाया। वहीं, रीजनिंग के सवालों में भी अभ्यर्थियों को माथापच्ची करनी पड़ी। माइनस मार्किंग के कारण हर सवाल का काफी सोच-समझकर जवाब देना था, ऐसे में पेपर हल करने के लिए जितना वक्त मिला, वह कम लगा। परीक्षा में भारतीय संविधान और जनगणना से जुड़े सवाल भी आए। लेकिन ऐसे सवालों की संख्या काफी कम रही।