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तीन दिन से बच्चे की लाश लेकर मंदिर के इर्द-गिर्द घूम रहा बंदर जोड़ा
Sat, 02 May 2020 01:15 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 May 2020 01:15 AM IST
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- फोटो : prayagraj
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संतान चाहे इंसान की हो या फिर पशु पक्षियों की, मां-बाप को पीड़ा बराबर होती है। इसकी बानगी इन दिनों क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं प्राचीन स्थल मनकामेश्वर धाम में देखने को मिल रही है। जहां एक बंदर जोड़ा अपने मासूम बच्चे की लाश लेकर तीन दिन से इधर-उधर भटक रहा है। वह गुमशुम से बैठे रोते रहते हैं। यह कोई कल्पना नहीं बल्कि वहां पूजा करने वाले पुजारी एवं दर्शन करने जाने वाले लोगों की आंखों देखी सच्ची घटना है, जो संतान के प्रति माता-पिता के अगाध प्रेम का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
क्षेत्र के मनकामेश्वर मंदिर भगवान भोलेनाथ का विशाल शिवलिंग और प्राकृतिक छटा यहां की प्रमुख पहचान है। धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्यता के प्रतीक इस स्थल पर जंगली पशु पक्षियों का भी जमघट होता है। सबसे अधिक यहां बंदरों की भीड़ होती है। इन बंदरों का जीवन यहां मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले खाने पीने की सामग्री पर ही निर्भर रहता है। लाकडाउन की वजह से यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही शून्य हो गई है। नतीजा इन बंदरों को खाने पीने की सामग्री के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है।
कभी कभार कुछ लोग उधर जाते हैं तो चना, लाइन आदि बंदरों को खिला देते हैं। सैकड़ों की संख्या में रहने वाले बंदरों की भीड़ में एक बंदर जोड़ा ऐसा है जो पिछले तीन दिनों से बिचलित अवस्था में इधर-उधर घूम रहा है। इस जोड़े में बंदरिया की गोद में एक बंदर का मृत बच्चा है, जिसे लेकर वह बीते तीन दिनों से घूम रही है। मनकामेश्वर मंदिर में रहने वाले महात्मा कल्लू बाबा, दीपक पांडेय, आशीष कुमार आदि ने बताया कि इस बंदर जोड़े का बच्चा तीन दिन पहले मर गया था। तभी से बंदरिया बच्चे की लाश को गोद में लिए इधर-उधर टहल रही है। उसके साथ उसका बंदर भी है। यहां आने वाले लोग इनके बारे में जानकर द्रवित हो जा रहे हैं।
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क्षेत्र के मनकामेश्वर मंदिर भगवान भोलेनाथ का विशाल शिवलिंग और प्राकृतिक छटा यहां की प्रमुख पहचान है। धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्यता के प्रतीक इस स्थल पर जंगली पशु पक्षियों का भी जमघट होता है। सबसे अधिक यहां बंदरों की भीड़ होती है। इन बंदरों का जीवन यहां मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले खाने पीने की सामग्री पर ही निर्भर रहता है। लाकडाउन की वजह से यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही शून्य हो गई है। नतीजा इन बंदरों को खाने पीने की सामग्री के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है।
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कभी कभार कुछ लोग उधर जाते हैं तो चना, लाइन आदि बंदरों को खिला देते हैं। सैकड़ों की संख्या में रहने वाले बंदरों की भीड़ में एक बंदर जोड़ा ऐसा है जो पिछले तीन दिनों से बिचलित अवस्था में इधर-उधर घूम रहा है। इस जोड़े में बंदरिया की गोद में एक बंदर का मृत बच्चा है, जिसे लेकर वह बीते तीन दिनों से घूम रही है। मनकामेश्वर मंदिर में रहने वाले महात्मा कल्लू बाबा, दीपक पांडेय, आशीष कुमार आदि ने बताया कि इस बंदर जोड़े का बच्चा तीन दिन पहले मर गया था। तभी से बंदरिया बच्चे की लाश को गोद में लिए इधर-उधर टहल रही है। उसके साथ उसका बंदर भी है। यहां आने वाले लोग इनके बारे में जानकर द्रवित हो जा रहे हैं।
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