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1400 युवाओं से करोड़ों की ठगी में मनी लांड्रिंग का केस

Sun, 04 Jul 2021 01:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Jul 2021 01:19 AM IST
सार

  • हाईकोर्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी के पूर्व एकाउंटेंट समेत चार नामजद

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Money laundering case in cheating of crores from 1400 youth
arrest - फोटो : istock

विस्तार

माफिया के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने करोड़ों की ठगी के आरोपियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी के तहत हाईकोर्ट में नौकरी के नाम पर 50 करोड़ की ठगी करने के मामले में उसकी ओर से मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया गया है। इसमें हाईकोर्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी के पूर्व अकाउंटेंट समेत चार लोगों को नामजद किया गया है। चारों को पिछले साल एसटीएफ ने गिरफ्तार कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया था। जिसने 1500 से ज्यादा युवाओं को अपना शिकार बनाया था।
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एसटीएफ ने इलाहाबाद और पटना उच्च न्यायालय में समीक्षा अधिकारी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए बेरोजगार युवकों से करोड़ों की ठगी का खुलासा पिछले साल अप्रैल में किया था। जिसमें सरगना समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी संख्या में दस्तावेज, एक लाख तीस हजार नकद, 37 हजार पुराने नोट, तीन लक्जरी गाड़ियों समेत कई चीजें बरामद हुई हैं।
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गिरफ्तार आरोपियों में हाईकोर्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी का तत्कालीन सचिव मो. शमीम अहमद निवासी अरसई सोरांव, राघवेंद्र सिंह निवासी स्टाफ कालोनी एमएनएनआईटी कालेज, चर्चलेन के नीरज पराशर और नवाबगंज के रमेश चंद्र यादव शामिल हैं। ईडी ने इन्हीं चार आरोपियों केखिलाफ मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया है। दरअसल एसटीएफ के खुलासे के दौरान यह बात सामने आई थी आरोपियों ने ठगी के पैसों से अकूत संपत्ति बनाई। सरगना शमीम की ओर से ही ऑटोमोबाइल एजेंसी व करोड़ों की जमीन खरीदने की बात सामने आई थी। मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर ईडी की ओर से इन्हीं बिंदुओं पर जांच की जाएगी। इसके बाद अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियां को अटैच करने की कार्रवाई की जाएगी।
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खुद को डिप्टी रजिस्ट्रार बताता था सरगना
गिरोह का सरगना शमीम खुद को हाईकोर्ट का डिप्टी रजिस्ट्रार बताता था।  उसने इलाहाबाद और पटना उच्च न्यायालय में समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, उपनिबंधक, लिपिक आदि पदों और सेतु निगम में लिपिक और चपरासी के पदों के लिए 14 सौ बेरोजगारों से करीब 50 करोड़ लिए थे। उनके पास से नियुक्ति पत्र, विभिन्न अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन, सेवाग्रहण आदेश, तमाम अभ्यर्थियों के अंक और प्रमाण पत्र, 12 बैंकों के चेक आर्टिगा, इटियास और वैगन आर कारों के साथ सात मोबाइल मिले थे। पकड़ा गया अन्य सदस्य राघवेंद्र सिंह एमएनएनआईटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था जो सस्पेंड चल रहा था। 
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