यूपी : पट्टे के विपरीत खनन और बिना पट्टे के खनन अलग-अलग अपराध- हाईकोर्ट
अवैध खनन और चोरी से खनन में अलग-अलग कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई एक ही अपराध में नहीं की जा सकती दोहरी कार्यवाही
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अवैध खनन व चोरी से खनन दोनों अलग-अलग अपराध हैं। अवैध खनन पर माइंस एंड मिनरल एक्ट के तहत आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है और चोरी से अवैध खनन के अपराध पर आईपीसी के तहत पुलिस केस चलाया जा सकता है। कानून में कोई रोक नहीं है। मगर एक ही अपराध में दोहरी आपराधिक कार्यवाही नहीं कही जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट पर मजिस्ट्रेट संज्ञान ले सकता है और पुलिस रिपोर्ट पर अधिकृत प्राधिकारी कंप्लेंट केस कायम कर सकता है। अपराध की विवेचना का काम पुलिस का है। एफआईआर दर्ज करने पर माइंस एंड मिनरल एक्ट की धारा 22 रोक नहीं लगाती। कोर्ट ने कहा अवैध खनन व चोरी से खनन एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग अपराध हैं। कोर्ट ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि माइंस एंड मिनरल एक्ट की धारा 4 के उल्लंघन करने पर एक्ट के तहत ही केस चलेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव ने चोपन, सोनभद्र के राम बहाल की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में 30 मई 19 की पुलिस चार्जशीट, 27 अगस्त 20 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र द्वारा संज्ञान लेने व राज्य सरकार बनाम दिनेश शर्मा व अन्य केस कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि यदि भारतीय दंड संहिता व माइंस एंड मिनरल एक्ट दोनों में अपराध हुआ है तो एक कानून में ही केस चलेगा।
दोनों कानूनों में केस चलाना एक अपराध पर दोहरी कार्यवाही मानी जाएगी, यह गलत है। सरकार का कहना था कि यदि दो भिन्न अपराध हैं तो अलग-अलग आपराधिक कार्यवाही की जाएगी। यदि पट्टे की शर्तों के विपरीत अवैध खनन किया गया है तो माइंस एंड मिनरल एक्ट के तहत कार्यवाही होगी। यदि बिना पट्टे या लाइसेंस या प्राधिकार के खनन किया गया है और बेईमानी से ट्रांसपोर्ट करता है तो भारतीय दंड संहिता के तहत कार्यवाही होगी। कोर्ट ने कहा खनन पट्टे की शर्तों के विपरीत धारा 4 के विरुद्ध खनन किया गया है तो धारा 21 का अपराध है और चोरी का भी अपराध है। दोनों कानूनों के तहत कार्यवाही होगी। इस पर कोई रोक नहीं है।