किराए के लिए चंदा शुरू हुआ तो पसीजा एआरएम का दिल, प्रवासियों को घर भेजने के लिए दिलाई बस की अनुमति
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इस बीच कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जब किराए के लिए चंदा करना शुरू किया, तब स्टेशन प्रबंधक का दिल पसीज गया और उन्होंने प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए दो बसों की अनुमति दिलाई। उड़ीसा से आठ जून पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से पहुंचे प्रवासी मजदूरों को पैसे के अभाव में यहां दो दिन तक भटकना पड़ा।
हैदरगढ़ और बाराबंकी के बच्चों, महिलाओं समेत 78 प्रवासी मजदूरों को रेलवे स्टेशन से सिविल लाइंस बस अड्डे यह कहकर भेजा गया कि उनको वहां से मुफ्त में बसें मिल जाएंगी। बसे अड्डे पहुंचने पर उनको बताया गया कि मुफ्त बसें स्टेशन से चलनी बंद हो गई हैं। बस पकड़ने के लिए उनको या तो ब्वायज हाईस्कूल या फिर नैनी जाना होगा।
ब्वायज हाईस्कूल जाने पर पता चला कि वहां से भी अब प्रवासी मजदूरों के लिए बसें चलनी बंद हो गई हैं। इसके बाद रात भर प्रवासी मजदूर स्टेशन परिसर से लेकर सड़क तक भटकते रहे। इस दौरान किसी ने भटकते प्रवासी मजदूरों की पीड़ा सोशल मीडिया पर साझा कर दी।
इसके बाद इलाहाबाद हेल्प ग्रुप से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अंशु मालवीय, उत्पला शुक्ला ने स्टेशन पहुंचकर पैसे के अभाव में परेशान मजदूरों को खाना खिलाया। इसके बाद मददगारों की संख्या भी बढ़ने लगी। कुछ देर बाद ही पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह के साथ समाजसेवी अनुराधा, अनंत कुमार चौधरी, अनुपम सिन्हा, सुबोध यादव, अश्विनी कुमार,मेहताब आलम, पूर्व पार्षद दिनेश कुमार गुप्ता भी बस स्टेशन पहुंच गए।