प्रयागराज : 2051 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रही मेट्रो लाइट, छह माह में तैयार हो जाएगा डीपीआर
मेट्रो लाइट की एक ट्रेन में तीन छोटे कोच होंगे। एक कोच में 70 से 80 के बैठने और करीब 300 लोगों के खड़े होकर सफर करने की क्षमता होगी। डीपीआर बनाने के लिए राइट्स को जनवरी 2024 तक का समय दिया गया है। पहले फेज में 44 किलोमीटर का रूट तैयार होगा।
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संगम नगरी में बनने वाली मेट्रो लाइट को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। छह महीने के अंदर राइट्स संस्था डीपीआर पीडीए को देगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। प्रयागराज में बनने वाली मेट्रो लाइट अन्य शहरों में चलने वाली मेट्रो के मुकाबले हल्की होगी। इससे संचालन में सुविधा रहेगी।मेट्रो लाइट की एक ट्रेन में तीन छोटे कोच होंगे।
एक कोच में 70 से 80 के बैठने और करीब 300 लोगों के खड़े होकर सफर करने की क्षमता होगी। डीपीआर बनाने के लिए राइट्स को जनवरी 2024 तक का समय दिया गया है। पहले फेज में 44 किलोमीटर का रूट तैयार होगा। प्रयागराज में बनने वाली मेट्रो को लेकर राइट्स के अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो और मेट्रो लाइट में कोई खास अंतर नहीं होगा।
पीडीए के अधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2024 तक डीपीआर बनने के बाद इसके निर्माण की प्रक्रिया पर कार्य शुरू हो जाएगा। हालांकि, वास्तव में निर्माण कार्य महाकुंभ 2025 के बाद ही शुरू होगा, लेकिन डीपीआर बनने के बाद कोच का डिजाइन, उसकी पटरी बिछाने के लिए अन्य कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान कुछ निर्माण कार्य भी पीडीए की तरफ से शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि, पहले चरण में किस रूट पर कार्य शुरू होगा, इसके लेकर अभी अधिकारी कुछ भी नहीं कह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद इसका निर्णय होगा।
मेट्रो लाइट की डीपीआर बनाने के लिए राइट्स को जनवरी तक का मौका दिया गया है। इसमें एक ट्रेन में तीन कोच होंगे। डीपीआर बनने के बाद आगे की तैयारी होगी। - नीरज कुमार गुप्ता, मुख्य अभियंता, पीडीए