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Prayagraj News: दवाएं मुफ्त, पर खरीद रहे पानी
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ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बना अस्पताल जब खुद ही बीमार हो, तो मरीजों का भटकना तय हो जाता है। मऊआइमा क्षेत्र के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धरौता की हालत भी कुछ ऐसी ही है। इस स्वास्थ्य केंद्र में न तो डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध हैं और न ही इलाज के लिए जरूरी उपकरण। हालात इतने बदतर हैं कि अस्पताल में भले ही मुफ्त दवाएं मिल जाएं, लेकिन मरीजों और उनके तीमारदारों को पीने के पानी को बाहर से खरीदारी करनी पड़ती है। अस्पताल परिसर में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, यहां तक कि एक हैंडपंप तक नहीं लगाया गया है।
स्वास्थ्य केंद्र की इस अव्यवस्था से क्षेत्रीय ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हों, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कैसे किया जाए। जिम्मेदारों की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सोरांव के पूर्व भाजपा विधायक रंगबहादुर पटेल की पहल पर ढाई दशक पहले धरौता गांव में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत हुई थी। दो एकड़ में अस्पताल के साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आवासीय बिल्डिंग बनाई गई। इस अस्पताल से बोड़ीपुर, धरौता, चंदीपट्टी, कटभर प्रवेजपुर, छात बड़ौरा, सिटकहवा, तिलई बाजार और घीनपुर सहित कई गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक लापता हैं। फार्मासिस्ट मधुकर श्रीवास्तव व वार्ड बॉय राजेश सिंह पर मरीजों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल जब शुरू हुआ था तो 120 से 150 मरीजों की ओपीडी होती थी। अब ओपीडी 20 से 25 तक सीमित हो गई। लोगों ने बताया कि बिल न जमा करने की वजह से अस्पताल परिसर की बिजली एक दशक पहले ही काट दी गई। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
बोले ग्रामीण नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धरौता में इलाज की सुविधा नहीं है। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है। - ऋषि प्रजापति
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जब अस्पताल खुला था तो मरीजों की भीड़ लगती थी। पीएचसी में अब कुछ ही मरीज इलाज के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है। - राजेंद्र यादव
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद जर्जर है। स्वास्थ्य कर्मियों के न होने से मरीजों को 10 किमी दूर सीएचसी मऊआइमा आना पड़ता है। - जितेंद्र पटेल
अस्पताल में इलाज का कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां डॉक्टर की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है। फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। जो दवा दे देते हैं, उसे ही खाना पड़ता है। - रामपूजन
कोट
अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। - डॉ. राकेश कुमार, अधीक्षक, सीएचसी मऊआइमा
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स्वास्थ्य केंद्र की इस अव्यवस्था से क्षेत्रीय ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हों, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कैसे किया जाए। जिम्मेदारों की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सोरांव के पूर्व भाजपा विधायक रंगबहादुर पटेल की पहल पर ढाई दशक पहले धरौता गांव में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत हुई थी। दो एकड़ में अस्पताल के साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आवासीय बिल्डिंग बनाई गई। इस अस्पताल से बोड़ीपुर, धरौता, चंदीपट्टी, कटभर प्रवेजपुर, छात बड़ौरा, सिटकहवा, तिलई बाजार और घीनपुर सहित कई गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक लापता हैं। फार्मासिस्ट मधुकर श्रीवास्तव व वार्ड बॉय राजेश सिंह पर मरीजों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल जब शुरू हुआ था तो 120 से 150 मरीजों की ओपीडी होती थी। अब ओपीडी 20 से 25 तक सीमित हो गई। लोगों ने बताया कि बिल न जमा करने की वजह से अस्पताल परिसर की बिजली एक दशक पहले ही काट दी गई। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
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बोले ग्रामीण नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धरौता में इलाज की सुविधा नहीं है। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है। - ऋषि प्रजापति
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जब अस्पताल खुला था तो मरीजों की भीड़ लगती थी। पीएचसी में अब कुछ ही मरीज इलाज के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है। - राजेंद्र यादव
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद जर्जर है। स्वास्थ्य कर्मियों के न होने से मरीजों को 10 किमी दूर सीएचसी मऊआइमा आना पड़ता है। - जितेंद्र पटेल
अस्पताल में इलाज का कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां डॉक्टर की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है। फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। जो दवा दे देते हैं, उसे ही खाना पड़ता है। - रामपूजन
कोट
अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। - डॉ. राकेश कुमार, अधीक्षक, सीएचसी मऊआइमा