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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mauni Amavasya accident: High Court asked- how many people have received ex-gratia compensation so far

UP:महाकुंभ हादसे में पत्नी की मौत, चार माह बाद भी पति को नहीं मिला मुआवजा, हाईकोर्ट ने पूछा-आखिर जिम्मेदार कौन

Sat, 07 Jun 2025 06:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Jun 2025 06:28 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से उनके जिम्मेदार अधिकारियों के माध्यम 28 जनवरी 2025 से महाकुंभ खत्म होने तक उनके यहां लाए गए मरीजों, शवों का ब्योरा के साथ ही सुपुर्द किए गए शवों का ब्योरा मांगा है। 

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Mauni Amavasya accident: High Court asked- how many people have received ex-gratia compensation so far
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के दिन हुए हादसे के पीड़ितों को मुआवजे की अदायगी में सरकारी लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार नागरिकों की ‘ट्रस्टी’ है, केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं। पीड़ितों तक उनका लाभ पहुंचाना भी राज्य का दायित्व है। मुआवजा नीति बनी है तो उसका लाभ पीड़ितों को बिना किसी देरी के मिलना चाहिए।

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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति संदीप जैन की खंडपीठ ने बिहार निवासी उदय प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। दरअसल, याची का दावा है कि महाकुंभ में भगदड़ के दौरान उसकी पत्नी की मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने घोषणा की, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी मुआवजा न मिलने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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याचिका पर राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याची मुआवजे का दावा करेगा तो उस पर विचार किया जाएगा। इस पर नाराज कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का असंवेदनशील रवैया है। सुदूर क्षेत्रों व राज्यों से आए नागरिकों से दावा करने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। सरकार ने मुआवजा देने की योजना बनाई है तो उसका लाभ सभी पीड़ितों को स्वतः दिया जाना चाहिए।
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महाकुंभ के दौरान सीएमओ, मेडिकल कॉलेज समेत सभी सरकारी अस्पतालों से भर्ती व मृतकों का ब्योरा तलब

हाईकोर्ट ने प्रयागराज के सीएमओ, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, एसआरएन अस्पताल, टीबी सप्रू, महिला अस्पताल समेत कई सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है। उनसे महाकुंभ के दौरान अस्पतालों में भर्ती व मृतकों का तिथिवार ब्योरा हलफनामे संग तलब किया है।

सरकार पेश करे मुआवजे के दावेदारों की सूची, निस्तारण का भी हाल बताएं

कोर्ट ने राज्य सरकार से महाकुंभ हादसे में पीड़ित परिवार की ओर से मुआवजे का दावा करने वालों की सूची पेश करने का आदेश भी दिया है। साथ ही कहा है कि 18 जुलाई को उन दावों के निस्तारण का ताजा हाल भी बताएं

बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंप दिए शव...कोर्ट हैरान

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि न तो अस्पताल की ओर से कोई स्पष्ट दस्तावेज दिया गया और न ही बताया गया कि शव कहां से आया...अस्पताल से या कहीं और से। कोर्ट यह जान हैरान रहा कि बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट (अटॉप्सी रिपोर्ट) व विवरण के शव परिजनों को सौंप दिए गए। यह भी नहीं बताया गया कि शव महाकुंभ क्षेत्र के किस हिस्से से लाया गया, किस डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया और कब की घटना है। कोर्ट ने कहा कि यह लापरवाही दर्शाती है कि मेला प्रशासन और चिकित्सा तंत्र में गंभीर समन्वय की कमी थी।

सरकारी और निजी अस्पतालों की भूमिका पर भी सवाल

रिकॉर्ड के अनुसार कुंभ मेले के दौरान एक केंद्रीय अस्पताल और 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत थे। 305 बेड की व्यवस्था सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट नर्सिंग होम में की गई थी। शव विच्छेदन के लिए एसआरएन और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम हाउस चिह्नित थे। कोर्ट ने कहा कि इतने प्रबंधों के बावजूद एक महिला की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं, यह गंभीर लापरवाही है।

न्याय और मुआवजा हर पीड़ित का हक है। पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए भटकना न पड़े, यह सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। -इलाहाबाद हाईकोर्ट

क्या है मामला

बिहार के कैमूर जिला के करौदा क्षेत्र निवासी याचिकाकर्ता उदय प्रताप सिंह की पत्नी अपने बेटे के साथ प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ मेले में आई थीं। 29 जनवरी 2025 को वह मेले से लापता हो गईं। जिसके बाद पांच फरवरी 2025 को उसके बेटे को उसका शव मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज के शव गृह से सौंपा गया। उस समय कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रदान नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने बिहार में शव का ऑटोप्सी कराया जिसमें प्रथम दृष्टया मौत का कारण दबाव से पसलियों का टूटना बताया गया। इस आधार पर याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के नीति की शर्तों के आधार पर मुआवजे की मांग की है।

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