थरवई में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के मामले में पुलिस 45 घंटे बाद भी खाली हाथ रही। खुलासे के लिए लगी सात टीमें गांवों से लेकर शहर भर तक सुरागरशी में जुटी रहीं, लेकिन न ही हत्या की वजह सामने आ सकी और न ही हत्यारों का कोई सुराग मिल सका।
थरवई हत्याकांड : दूसरे दिन भी पुलिस के हाथ खाली, हत्यारों का सुराग देने वाले को 25 हजार का इनाम
वारदात के कुछ घंटों बाद ही आला पुलिस अधिकारियों ने मामले के खुलासे के लिए सात टीमों का गठन किया था। इसमें स्थानीय पुलिस के साथ ही एसओजी के भी जवान शामिल हैं। सभी टीमें थरवई के साथ ही आसपास के थाना क्षेत्रों और यहां तक कि शहर में भी सुरागरशी में लगी रहीं लेकिन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल सका।
टीमों को अलग-अलग टास्क, एसटीएफ भी लगी
खुलासे में लगी टीमों में से प्रत्येक टीमों को अलग-अलग टास्क दिया गया है। मसलन, इलाके में रहने वाले खानाबदोशों का सत्यापन, चिह्नित अपराधियों की मौजूदा स्थिति, खेवराजपुर व मऊआइमा में परिवार के लोगों से विस्तृत पूछताछ, घटनास्थल तक आने जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की पड़ताल समेत अन्य टास्क टीमों को दिए गए हैं। इसके अलावा पूर्व में हुए सामूहिक हत्याकांडों की सभी वारदातों की समीक्षा में भी एक टीम लगाई गई है। उधर मामले के खुलासे में शासन के निर्देश पर एसटीएफ भी लग गई है। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि एसटीएफ की 10 अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।
गंगापार के सभी थाना क्षेत्रों की 12 घंटे में मांगी रिपोर्ट
सामूहिक हत्याकांडों की लगातार हो रही वारदातों को देखते हुए गंगापार क्षेत्र की पुलिसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी अफसर जुट गए हैं। इसके तहत गंगापार के सभी 13 थाना क्षेत्रों की पुलिसिंग की समीक्षा की जिम्मेदारी राजपत्रित पुलिस अफसरों को दी गई है। साथ ही उन्हें निर्देशित किया गया है कि वह 12 घंटे के भीतर रिपोर्ट दें। इसके अलावा सभी थाना क्षेत्रों में रात के वक्त 12 से भोर में चार बजे तक सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि खासतौर से ग्रामीण इलाकों में इस अवधि में सड़क पर घूमने वाले हर शख्स से पूछताछ और चेकिंग की जाए।
दंपती समेत एक परिवार के पांच लोगों की कर दी गई थी नृशंस हत्या
जिले का गंगापार इलाका एक बार फिर सामूहिक हत्याकांड से दहल उठा। थरवई के खेवराजपुर में अधेड़ दंपती समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। उन्हें पीट-पीटकर और नुकीले हथियार से गोद--गोदकर मौत के घाट उतार दिया गया। मृतकों में दंपती की बहू व बेटी भी शामिल हैं।
हत्यारों ने दंपती की एक साल की पौत्री को भी मार डाला। कत्ल के बाद घर के एक कमरे को आग के हवाले कर हत्यारे फरार हो गए। खास बात यह कि दंपती की एक अन्य पौत्री सुरक्षित मिली। पुलिस मृतक के बेटे की तहरीर पर अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल में जुटी है।
दूध का व्यापार करता था राजकुमार
खेवराजपुर में रहने वाला 55 वर्षीय राजकुमार यादव दूध का व्यापार करता था। परिवार में बेटे सुनील के अलावा उसकी 50 वर्षीय पत्नी कुसुम देवी के अलावा 25 वर्षीय बहू, पांच व एक साल की दो पौत्रियां मीनाक्षी व साक्षी और 22 वर्षीय विकलांग बेटी शामिल थीं। सुनील शहर में प्रयाग स्टेशन के पास गुमटी चलाता था और वहीं किराये पर रहता था। वह दो-तीन दिन के अंतराल पर घर आया करता था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार भोर में 4.30 बजे के करीब घर से धुआं निकलता देख कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो भीतर का दृश्य देखकर दहल उठे। आंगन में दंपती, उनकी बेटी और बरामदे में बहू व एक साल की साक्षी खून से लथपथ मृत पड़े थे। जबकि पांच साल की मीनाक्षी बिस्तर पर पड़ी बिलख रही थी।
बरामदे से सटे हुए कमरे में आग लगी थी और यहीं से धुआं निकल रहा था। सूचना पर फायरब्रिगेड पहुंची और फिर आग पर काबू पाया गया। एक परिवार की पांच लोगों की हत्या की खबर से सनसनी फैल गई। जानकारी पर सुनील और डीएम-एसएसपी समेत तमाम अफसर भी पहुंच गए। बेटे से पूछताछ के बाद पुलिस ने पांचों शवों को कब्जे में लेकर मर्चरी भेज दिया।