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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Markandeya Katju and Amitabh Thakur court notice

मार्कण्डेय काटजू और अमिताभ ठाकुर को कोर्ट का नोटिस

Thu, 23 Jul 2015 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 23 Jul 2015 02:27 AM IST
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इलाहाबाद। सेशन कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और आईजी अमिताभ ठाकुर को अलग-अलग मामलों में नोटिस जारी किया है। दोनों के खिलाफ अदालत में 156(3) के तहत अर्जी देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। अपर सेशन जज मलखान सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।
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इन मामलों की सुनवाई 11 अगस्त को होगी। अधिवक्ता राकेशनाथ पांडेय ने पूर्व न्यायमूूर्ति मार्कण्डेय काटजू के टाइम्स ऑफ इंडिया में 31 मार्च 2015 को प्रकाशित बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘गाय का मांस प्रोटीन का सस्ता स्रोत है’ को आधार बनाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। सीजेएम इलाहाबाद ने प्रार्थनापत्र चार जून 2015 को खारिज कर दिया था। अधिवक्ता ने इसके विरुद्ध सेशन कोर्ट में निगरानी दाखिल की थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने निगरानी स्वीकार करते हुए विपक्षी पूर्व न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रकाशक को नोटिस जारी किया है।
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सिविल डिफेंस के आईजी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ अधिवक्ता राकेश नाथ पांडेय ने 156(3) के तहत अर्जी देकर नबी हत्याकांड के बाद आरोपी दरोगा शैलेंद्र सिंह के पक्ष में चंदा जुटाने, सरकारी अधिकारी होने के बावजूद हत्यारोपी की सहायता और बचाव करने का आरोप लगाया है। यह प्रार्थनापत्र भी सीजेएम ने 10 जून 2015 को खारिज कर दिया था। सीजेएम के आदेश को निगरानी दाखिल कर चुनौती दी गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने निगरानी स्वीकार करते हुए अमिताभ ठाकुर को नोटिस जारी किया है।
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अदालत ने इलाहाबाद के पूर्व जिलाधिकारी राजशेखर (वर्तमान में लखनऊ के डीएम) को भी नोटिस जारी किया है। राकेश नाथ पांडेय ने राजशेखर और संयुक्त निदेशक अभियोजन, अभियोजन अधिकारी अवधेश पांडेय तथा पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता रणेंद्र प्रताप सिंह को सीजेएम के आदेश के विरुद्ध निगरानी दाखिल करने का आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।  सीजेएम ने एसपी गंगापार शफीक अहमद, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी फूलपुर गीतांजलि सिंह, एसओ थरवई मृत्युंजय मिश्र के खिलाफ 17 अक्तूबर 2015 को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। डीएम राजशेखर और अभियोजन अधिकारियों ने इस आदेश के विरुद्ध निगरानी दाखिल की थी।

चूंकि यह अधिकारीगण अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए इनके द्वारा सीजेएम के आदेश के विरुद्ध निगरानी दाखिल करना आईपीसी के तहत दंडनीय अपराध है। सीजेएम ने यह प्रार्थनापत्र भी खारिज कर दिया था। इसके विरुद्ध निगरानी स्वीकार करते हुए एडीजे मलखान सिंह ने सभी विपक्षियों को नोटिस जारी किया है।


जिला जज ने सुधीर शर्मा द्वारा दाखिल निगरानी स्वीकार करते हुए पूर्व उपजिलाधिकारी सोरांव शत्रोहन वैश्य को नोटिस जारी किया है। शत्रोहन के खिलाफ 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। उन पर जानबूझकर विधि विरुद्ध आदेश पारित करने का आरोप है। सीजेएम ने यह प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया था, जिसे निगरानी में स्वीकार किया गया।
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