Mahakumbh : साल स्लीपर की गुणवत्ता परखने के लिए कमेटी गठित, विशेषज्ञों की कमेटी आज जाएगी छत्तीसगढ़
साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति के अनुबंध पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसने वाली तंबुओं की नगरी में प्रवेश के लिए गंगा पर 30 पांटून पुलों का निर्माण होना है। इसके लिए 80,000 साल स्लीपर और आठ हजार साल एजिंग की आपूर्ति होनी है।
विस्तार
महाकुंभ में गंगा पर बनने वाले पांटून पुलों के लिए साल स्लीपर की आपूर्ति से पहले गुणवत्ता परखी जाएगी। वन निगम और पीडब्ल्यूडी के विशेषज्ञों की 17-17 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। खींचतान की वजह से अब तक साल स्लीपर की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति के अनुबंध पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसने वाली तंबुओं की नगरी में प्रवेश के लिए गंगा पर 30 पांटून पुलों का निर्माण होना है। इसके लिए 80,000 साल स्लीपर और आठ हजार साल एजिंग की आपूर्ति होनी है।
पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एके द्विवेदी के मुताबिक टेंडर में हिस्सा लेने वाली एल-वन दरों वाली पांच फर्मों के नाम अनुबंध कर नियमानुसार वर्क आर्डर जारी किया गया है। न्यूनतम दरों पर टेंडर डालने वाली फर्मों से साल स्लीपर की आपूर्ति में 45 करोड़ रुपये का विभागीय फायदा होने का अनुमान है। स्लीपर की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित कर रायपुर के लिए रवाना कर दी गई है।
स्लीपर की गुणवत्ता परखने के बाद आपूर्ति शुरू हो जाएगी। हालांकि साल स्लीपर की आपूर्ति की कवायद बीती जनवरी में ही शुरू हो गई थी, लेकिन तब तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति के बिना 99 करोड़ रुपये के आर्डर को न सिर्फ निरस्त किया गया, बल्कि अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद नए सिरे से टेंडर कमेटी गठित कर प्रक्रिया शुरू कराई गई।
इस बार भी टेंडर नियमों की अनदेखी की शिकायत बंगाल वुड एंड एलाइड प्रोडक्ट्स की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी और मेलाधिकारी से की गई। इसमें टेंडर नियमों में बदलाव करने के साथ ही प्रक्रिया में मनमानी कर छत्तीसगढ़ की अनुभवहीन फर्मों को टेंडर में शामिल करने का आरोप लगाया गया।
इसी दौरान रायपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी की ओर से महाकुंभ के टेंडर में हिस्सा लेने वाली रायपुर की फर्मों के भंडारण की जांच कराई गई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली थी। वन परिक्षेत्र अधिकारी की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि जिन फर्मों ने टेंडर में प्रतिभाग किया है, उनकी ओर से सालवुड के भंडारण का प्रस्तुत किया गया हलफनामा झूठा है। उनके पास आपूर्ति के लिए पर्याप्त भंडारण न होने की रिपोर्ट रायपुर के वनाधिकारी की ओर से दी गई थी।
कोट
कुल 80 हजार साल स्लीपर की महाकुंभ के लिए आवश्यकता है। जिन कंपनियों को वर्क आर्डर दिया गया है, उन्होंने 22 हजार साल स्लीपर तैयार होने की जानकारी दी है। इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए कमेटी बनाकर भेजी गई है। हफ्ते भर बाद एसई और एक्सईएन की टीम भी रायपुर भेजी जाएगी। - एके द्विवेदी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी