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Mahakumbh 2025 : संतों-नागाओं के दर्शन के लिए लालायित रहे श्रद्धालु, चरण रज लेने के लिए दौड़े भक्त

Mon, 03 Feb 2025 11:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 03 Feb 2025 11:55 AM IST
सार

अमृत स्नान के दौरान संतों एवं नागाओं की मौजूदगी सनातनी परंपरा का जयघोष कर रही थी तेा इनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखा। संतों एवं नागाओं के दर्शन की लालसा में स्नानार्थी अखाड़ा मार्ग की सुरक्षा मेंं हुई बेरिकेडिंग को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।

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Mahakumbh 2025: Devotees were eager to have darshan of saints and Nagas, devotees ran to take their feet
वसंत पंचमी पर अमृत स्नान करने के लिए जाते नागा संन्यासी। । - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अमृत स्नान के दौरान संतों एवं नागाओं की मौजूदगी सनातनी परंपरा का जयघोष कर रही थी तेा इनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखा। संतों एवं नागाओं के दर्शन की लालसा में स्नानार्थी अखाड़ा मार्ग की सुरक्षा मेंं हुई बेरिकेडिंग को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। घोड़ों पर सवार होकर और पैदल चल रहे नागा साधुओं ने शस्त्रों के साथ अपनी युद्ध कला का भी प्रदर्शन किया। सोमवार को अंतिम अमृत स्नान के दौरान नागा साधुओं का अद्भुत प्रदर्शन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना।

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त्रिवेणी तट पर इन साधुओं की पारंपरिक और अद्वितीय गतिविधियों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अमृत स्नान के लिए ज्यादातर अखाड़ों का नेतृत्व कर रहे इन नागा साधुओं का अनुशासन और उनका पारंपरिक शस्त्र कौशल देखने लायक था। कभी डमरू बजाते हुए तो कभी भाले और तलवारें लहराते हुए, इन साधुओं ने युद्ध कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। लाठियां भांजते और अठखेलियां करते हुए ये साधु अपनी परंपरा और जोश का प्रदर्शन कर रहे थे।

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Mahakumbh 2025: Devotees were eager to have darshan of saints and Nagas, devotees ran to take their feet
वसंत पंचमी पर अमृत स्नान करने के लिए जाते नागा संन्यासी। - फोटो : अमर उजाला।

घोड़ों पर और पैदल निकली शोभा यात्रा

बसंत पंचमी के अमृत स्नान के लिए निकली अखाड़ों की शोभा यात्रा में कुछ नागा साधु घोड़ों पर सवार थे तो कुछ पैदल चलते हुए अपनी विशिष्ट वेशभूषा और आभूषणों से सजे हुए थे। जटाओं में फूल, फूलों की मालाएं और त्रिशूल हवा में लहराते हुए उन्होंने महाकुम्भ की पवित्रता को और भी बढ़ा दिया। स्व-अनुशासन में रहने वाले इन साधुओं को कोई रोक नहीं सकता था, लेकिन वो अपने अखाड़ों के शीर्ष पदाधिकारियों के आदेशों का पालन करते हुए आगे बढ़े। नगाड़ों की गूंज के बीच उनके जोश ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। त्रिशूल और डमरू के साथ उनके प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि महाकुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के मिलन का उत्सव है।

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वसंत पंचमी पर अमृत स्नान करते नागा संन्यासी।। - फोटो : अमर उजाला।

नृत्य, नगाड़े और उत्साह

शोभायात्रा के दौरान मीडिया ही नहीं, बल्कि आम श्रद्धालुओं के मोबाइल के कैमरे भी नागा साधुओं को कैप्चर करने के लिए हवा में लहरा रहे थे। नागा भी किसी को निराश नहीं कर रहे थे, बल्कि वो अपने हाव भाव से उन्हें आमंत्रित कर रहे थे। कुछ नागा तो आंखों में काला चश्मा लगाकर आम लोगों से इंटरैक्ट भी कर पा रहे थे। उनकी इस स्टाइल को हर कोई कैद कर लेना चाहता था। यही नहीं, नागा साधु नगाड़ों की ताल पर नृत्य करते हुए अपनी परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी जोश और उत्साह से भरपूर गतिविधियों ने श्रद्धालुओं के बीच अपार उत्साह पैदा किया। जितने उत्साहित नागा साधु थे, उतने ही श्रद्धालु भी उनकी हर गतिविधि को देख मंत्रमुग्ध हो गए।

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वसंत पंचमी पर अमृत स्नान करने के लिए जाते नागा संन्यासी। - फोटो : अमर उजाला।

स्नान के दौरान भी मस्ती

स्नान के दौरान भी नागा साधुओं का अंदाज निराला था। त्रिवेणी संगम में उन्होंने पूरे जोश के साथ प्रवेश किया और पवित्र जल के साथ अठखेलियां कीं। इस दौरान सभी नागा आपस में मस्ती करते नजर आए।

महिला नागा संन्यासी भी जुटीं

पुरुष नागा साधुओं के साथ ही महिला नागा संन्यासियों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। पुरुष नागाओं की तरह ही महिला नागा संन्यासी भी उसी ढंग से तप और योग में लीन रहती हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि ये गेरुआ वस्त्र धारत करती हैं उसमें भी ये बिना सिलाया वस्त्र धारण करती हैं। उन्हें भी परिवार से अलग होना पड़ता है। खुद के साथ परिवार के लोगों का पिंड दान करना होता है तब जाकर महिला नागा संन्यासी बन पाती हैं। जब एक बार महिला नागा संन्यासी बन जाती हैं तो उनका लक्ष्य धर्म की रक्षा, सनातन की रक्षा करना होता है। इस महाकुंभ में हर कोई इनके बारे में जानने को उत्सुक नजर आ रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए संदेश

नागा साधुओं ने अपने व्यवहार और प्रदर्शन से यह संदेश दिया कि महाकुम्भ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के आत्मिक और प्राकृतिक मिलन का उत्सव है। उनकी हर गतिविधि में महाकुम्भ की पवित्रता और उल्लास का अद्वितीय अनुभव झलक रहा था। महाकुम्भ 2025 का यह आयोजन नागा साधुओं की विशिष्ट गतिविधियों और उनकी परंपराओं के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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