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इलाहाबाद हाईकोर्ट : कर्मचारी के लिखे पर मजिस्ट्रेट ने हस्ताक्षर कर जारी किया आदेश, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
Sat, 03 Sep 2022 04:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Sep 2022 04:24 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा इससे पहले भी कोर्ट नाराजगी जताई है। फिर भी ऐसे केस आये दिन देखें जा रहे हैं। कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में संज्ञान आदेश व आगे की कार्यवाही रद्द कर दी और नये सिरे से विवेक का इस्तेमाल कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के कर्मचारी द्वारा लिखे आदेश पर बिना न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए हस्ताक्षर कर जारी करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि इस तरह से आदेश न केवल अभियुक्त को हाईकोर्ट आने को विवश करते हैं, बल्कि इससे मजिस्ट्रेट की नाकाबिलियत ही प्रकट होती है। ऐसा करने से न्याय व्यवस्था से जन विश्वास डिग जायेगा।
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कोर्ट ने कहा इससे पहले भी कोर्ट नाराजगी जताई है। फिर भी ऐसे केस आये दिन देखें जा रहे हैं। कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में संज्ञान आदेश व आगे की कार्यवाही रद्द कर दी और नये सिरे से विवेक का इस्तेमाल कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार चतुर्थ ने प्रेम नगर, झांसी के आशीष कुमार उर्फ रिंकू व अन्य की याचिका पर दिया है।
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याची की ओर से कहा गया कि मृतका ने मृत्यु पूर्व बयान में कहा है कि खाना बनाते समय साड़ी में आग लग गई।उसे किसी ने जलाया नहीं है। विवेचना रिपोर्ट व मृत्यु कालिक बयान पर विचार किए बगैर मजिस्ट्रेट ने अदालत के कर्मचारी द्वारा लिखित आदेश पर हस्ताक्षर कर संज्ञान आदेश जारी किया है। न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं किया है। सारी कार्यवाही रद की जाय। कोर्ट ने कहा कि अंकित केस में ऐसे आदेश अवैध करार देते हुए वह रद्द कर चुकी है।
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