Magh Mela : बाबा रामदेव पहुंचे माघ मेला, संगम में लगाई डुबकी, सीएम योगी के खिलाफ टिप्पणी को बताया शर्मनाक
योग गुरु बाबा रामदेव ने बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई। चार्टर्ड प्लेन से संगमनगरी पहुंचे बाबा रामदेव माघ मेले में खाक चौक स्थित सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। यहां पर साधु-संतों के साथ पहुंचकर त्रिवेणी में डुबकी लगाई। रामदेव ने शंकराचार्य के द्वारा सीएम योगी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को शर्मनाक बताया।
विस्तार
योग गुरु बाबा रामदेव ने बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई। चार्टर्ड प्लेन से संगमनगरी पहुंचे बाबा रामदेव माघ मेले में खाक चौक स्थित सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। यहां पर साधु-संतों के साथ पहुंचकर त्रिवेणी में डुबकी लगाई। इसके बाद श्री बड़े हनुमानजी का दर्शन पूजन किया। यहां पर महंत बलवीर गिरि ने उनका स्वागत किया। दर्शन पूजन के बाद बाहर निकले रामदेव ने कहा कि वह त्रिवेणी में डुबकी लगाकर धन्य हो गए। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। कहा कि यह माघ का स्नान नहीं महास्नान है। जन्म जन्मांतरण का पुण्य उदय होने पर यहां पर स्नान करने का सौभाग्य मिलता है।
योगी के खिलाफ टिप्पणी को बताया शर्मनाक
योग गुरु बाबा रामदेव ने बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई। चार्टर्ड प्लेन से संगमनगरी पहुंचे बाबा रामदेव माघ मेले में खाक चौक स्थित सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। यहां पर साधु-संतों के साथ पहुंचकर त्रिवेणी में डुबकी लगाई। इसके बाद श्री बड़े हनुमानजी का दर्शन पूजन किया। यहां पर महंत बलवीर गिरि ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद का आशीर्वाद लेने के लिए झूंसी स्थित उनके शिविर पहुंचे। दर्शन पूजन के बाद बाहर निकले रामदेव ने कहा कि वह त्रिवेणी में डुबकी लगाकर धन्य हो गए। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। कहा कि यह माघ का स्नान नहीं महास्नान है। जन्म जन्मांतरण का पुण्य उदय होने पर यहां पर स्नान करने का सौभाग्य मिलता है।
माघ मेले में स्नान, दान और ध्यान का महत्व
पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए योग गुरु ने कहा कि माघ मेले स्नान का, दान का और ध्यान का विशेष महत्व है। साथ ही त्रिवेणी संगम में आना ही परम सौभाग्य की बात है। कई जन्मों का पुण्य उदय होने पर ही संगम त्रिवेणी में स्नान का सौभाग्य मिलता है। यहां आने पर दिव्यानुभूति हो रही है। माघ मेले में सीएम योगी आदित्यनाथ के द्वारा दिव्य व्यवस्था की गई है। यहां की व्यवस्था सनातन के गौरव को स्थापित कर रही है। इसे देखकर आत्म हर्षित हो रही है। यह सनातन का गौरव काल है।
मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद के बारे में कहा कि तीर्थों में कुछ लोग अलग-अलग प्रकार से एजेंडा लेकर चलते हैं। तीर्थ में किसी प्रकार व्यक्तिगत एजेंडा नहीं होना चाहिए। तीर्थराज संगम में किसी प्रकार अहंकार नहीं होना चाहिए। योगी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी पर कहा कि .यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी योगी और संन्यासी के खिलाफ इस प्रकार के शब्द शोभा नहीं देते। ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग शंकराचार्य तो बहुत दूर की बात है कोई किसी साधु को भी शोभा नहीं देता है। सभी को मर्यादा और गौरव गरिमा को बरकरार रखनी चाहिए। जिसका अभिमान नहीं गया वह साधु तो नहीं ही हो सकता।