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फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में माफिया मुख्तार अंसारी पर चलेगा मुकदमा
Fri, 26 Feb 2021 10:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 26 Feb 2021 10:41 PM IST
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मुख्तार अंसारी।
- फोटो : अमर उजाला।
स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी कराने के मामले में मुख्तार अंसारी की ओर से पेश उन्मोचन प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आरोप तय किए जाने के लिए आठ मार्च की तारीख नियत की है।
यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव ने मुख्तार अंसारी की ओर से प्रस्तुत दो अलग-अलग डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर उनके अधिवक्ताओं तथा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश गुप्ता को सुनने के बाद दिया है। प्रकरण गाजीपुर जिले का है। विधायक मुख्तार अंसारी एवं शास्त्र लिपिक सहित अन्य लोगों के खिलाफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी करने के मामले में धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था ।
अभियुक्तगण पर आरोप है कि शस्त्र पत्रावली फर्जी रूप से तैयार की गई जिसमें पुलिस अधीक्षक की संस्तुति संदिग्ध पाई गई है। तथा तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक रंजन का फर्जी हस्ताक्षर बनाया गया है । तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक रंजन ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने यह शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं किया था । मामले की विवेचना के पश्चात मुख्तार अंसारी व अन्य के खिलाफ धारा 467, 468 व 471 आईपीसी एवं धारा 30 आयुध अधिनियम के अंतर्गत आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था । विधायक होने के नाते मुख्तार अंसारी की पत्रावली विशेष न्यायालय एमपी एमएलए में सुनवाई की जा रही है।
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मुख्तार अंसारी की ओर से दी गई उन्मोचन अर्जी में कहा गया कि उनके विरुद्ध कागजातों को तैयार कराने के संबंध में कोई साक्ष्य एकत्र नहीं किया गया है तथा धारा 30 आयुध अधिनियम के अंतर्गत 6 माह की सजा का प्रावधान है द्य जबकि आरोप पत्र उसके बाद प्रस्तुत किया गया है । इसलिए उनको दोनों मामलों में डिस्चार्ज कर दिया जाए।
अभियोजन ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि संपूर्ण प्रक्रिया में अभियुक्त की सहभागिता और अपराधिक षड्यंत्र था । अपराध को पूर्णता प्रमाणित पाया गया है । इसके बाद ही आरोप पत्र प्रेषित किया गया है स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोप विरचित करने का आधार पर्याप्त पाते हुए मुख्तार अंसारी की उन्मोचन अर्जी खारिज कर दी है ।
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यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव ने मुख्तार अंसारी की ओर से प्रस्तुत दो अलग-अलग डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर उनके अधिवक्ताओं तथा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश गुप्ता को सुनने के बाद दिया है। प्रकरण गाजीपुर जिले का है। विधायक मुख्तार अंसारी एवं शास्त्र लिपिक सहित अन्य लोगों के खिलाफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी करने के मामले में धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था ।
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अभियुक्तगण पर आरोप है कि शस्त्र पत्रावली फर्जी रूप से तैयार की गई जिसमें पुलिस अधीक्षक की संस्तुति संदिग्ध पाई गई है। तथा तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक रंजन का फर्जी हस्ताक्षर बनाया गया है । तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक रंजन ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने यह शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं किया था । मामले की विवेचना के पश्चात मुख्तार अंसारी व अन्य के खिलाफ धारा 467, 468 व 471 आईपीसी एवं धारा 30 आयुध अधिनियम के अंतर्गत आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था । विधायक होने के नाते मुख्तार अंसारी की पत्रावली विशेष न्यायालय एमपी एमएलए में सुनवाई की जा रही है।
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मुख्तार अंसारी की ओर से दी गई उन्मोचन अर्जी में कहा गया कि उनके विरुद्ध कागजातों को तैयार कराने के संबंध में कोई साक्ष्य एकत्र नहीं किया गया है तथा धारा 30 आयुध अधिनियम के अंतर्गत 6 माह की सजा का प्रावधान है द्य जबकि आरोप पत्र उसके बाद प्रस्तुत किया गया है । इसलिए उनको दोनों मामलों में डिस्चार्ज कर दिया जाए।
अभियोजन ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि संपूर्ण प्रक्रिया में अभियुक्त की सहभागिता और अपराधिक षड्यंत्र था । अपराध को पूर्णता प्रमाणित पाया गया है । इसके बाद ही आरोप पत्र प्रेषित किया गया है स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोप विरचित करने का आधार पर्याप्त पाते हुए मुख्तार अंसारी की उन्मोचन अर्जी खारिज कर दी है ।