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फेफड़ फांक रहे धूल, सांसें गईं फूल

Tue, 17 May 2016 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Updated Tue, 17 May 2016 02:31 AM IST
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 Lungs are gathering dust , breath problem
नवाब यूसुफ रोड पर एक तरफ की पूरी सड़क खुदाई के कारण बदहाल हो गई। जिससे राहगीरों को एक ही सड़क से आना जाना पड़ रहा हैं। इस कारण रोज दुर्घटना हो रही हैं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
प्रदूषण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट फर्जी निकल गई। शहरियों को भी इस रिपोर्ट पर ऐतबार नहीं हुआ। वे अपने शहर को साफ-सुथरा और प्रदूषण से मुक्त देखना चाहते हैं लेकिन सरकारी विभाग अब भी सचेत नहीं हुए हैं। शहर भर की सड़कें खोदकर दूसरों को संगम नगरी की साख पर बट्टा लगाने का मौका दे रहे हैं। खोद कर छोड़ दी गई सड़कों की धूल उड़कर शहरियों के फेफेड़ में जा रही हैं और उन्हें बीमार बना रही है। सिर्फ बीमारी नहीं, शहर का अधिकांश हिस्सा इन आधी-अधूरी सड़कों के कारण आए दिन जाम से भी जूझ रहा है। 
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सिविल लाइंस में नवाब यूसुफ रोड, स्टैची रोड, सरदार पटेल मार्ग पर यात्रिक होटल के आसपास खोदी गई सड़क लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। एलगिन रोड पर महिला विद्यापीठ कॉलेज से मिश्र भवन चौराहा और वहां से पृथ्वी गार्डेन तक बाईं ओर रोड पटरी महीनों से खुदी पड़ी है। सुभाष चौराहा पर बीच सड़क बड़ा सा गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया। सिविल लाइंस को सुंदरीकरण के नाम पर बदसूरत बना दिया गया है। पत्थर गिराजाघर से लेकर हनुमान मंदिर चौराहा तक सड़क के दोनों ओर दुकानदारों से साथ वहां आने वाले भी परेशान हैं। हर तरफ मिट्टी, गिट्टी, ईंट, बालू का ढेर लगा है। रोड पटरी पैदल चलने लायक भी नहीं है। 
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अगर इस बीच बारिश हो गई तो काम ठप होने के साथ हालात भी और ज्यादा बदतर हो जाएंगे। सुंदरीकरण का काम बेहद धीमी गति से होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है। अगले कुछ दिनों में बारिश शुरू हो जाएगी। ऐसे में स्थिति और नरकीय होगी, क्योंकि सिविल लाइंस में जलनिकासी की व्यवस्था ठीक नहीं है। नाले बने हैं लेकिन उनकी कनेक्विटी नहीं है। ऐसे में सड़क पर जलभराव होना तय है। पटरी पार पुराने शहर में स्थित और खराब है। कटघर, मुट्ठीगंज, बाई का बाग, रामबाग, मीरापुर, अतरसुइया, अटाला समेत कई इलाकों में खोद कर छोड़ दी गई हैं। कहीं सीवर लाइन बिछाने के लिए तो कहीं किसी दूसरे काम के नाम पर सड़कें खोदी जा रही हैं। शहर उत्तरी के भी अधिकांश इलाकों की यही हालत है। 
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