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धन, ऐश्वर्य की कामना से पूजे गए लक्ष्मी-गणेश, कुबेर
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Laxmi Ganesh Pooja on Diwali
- फोटो : CITY DESK
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स्थिर लग्न वृष में शाम 6.21 बजे से रात 8.18 बजे तक के बीच ज्यादातर गृहस्थों, कारोबारियों ने किया पूजन
दीवार या तिजोरी पर रोली या सिंदूर से लिखे गए ‘श्री गणेशाय नम:, स्वास्तिक, शुभ-लाभ’ जैसे मांगलिक मंत्र
प्रयागराज। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर रविवार को दीपपर्व दीपावली धूमधाम से मनाई गई। शुभ मुहूर्त में धन, ऐश्वर्य के साथ ही सर्वमंगल की कामना से घरों के साथ ही व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी लक्ष्मी-गणेश और इंद्र-कुबेर का पूजन किया गया। अबकी स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजा के लिए तीन मुहूर्त रहे और तीनों ही गृहस्थों एवं कारोबारियों, दोनों के लिए शुभतादायी रहे।
अमावस्या तिथि रविवार को दिन में 11.51 बजे से आरंभ हुई जो सोमवार को सुबह 9.44 बजे तक रहेगी। रविवार को प्रदोष काल शाम 5.11 बजे से शाम 7.48 बजे तक रहा। लेकिन, प्रदोष काल व्यापिनी स्थिर लग्न वृष शाम 6.21 बजे से रात 8.18 बजे तक रहा, ऐसे में ज्यादातर लोगों ने अमावस्या, प्रदोष काल के उत्तम योग में इसी अवधि में लक्ष्मी-गणेश, इंद्र, कुबेर की पूजा की। नए कामों के श्रीगणेश के साथ ही बही खातों का पूजन भी किया गया। इससे पहले स्थिर लग्न कुंभ में दिन में 1.44 से 3.15 बजे के बीच भी पूजा की गई।
ज्यादातर श्रद्धालुओं ने अमवास्या पर ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्यै नम:’ मंत्र जाप के साथ लक्ष्मी पूजन किया। घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दीवार या तिजोरी पर रोली या सिंदूर से ‘श्री गणेशाय नम:, स्वास्तिक, शुभ-लाभ’ जैसे मांगलिक मंत्र भी लिखे गए। लक्ष्मी को गेंदा के साथ ही कमल के फूल भी चढ़ाए गए। वहीं तांत्रिक उपासकों ने अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल और स्थिर लग्न सिंह में रात 11.50 बजे से भोर में 3.04 बजे के बीच साधना की। यह मुहूर्त कालीपूजा के लिए भी सर्वोत्तम रहा। परंपरा के मुताबिक पूजन स्थल के पास दीपक से काजल भी उतारा गया।
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दीवार या तिजोरी पर रोली या सिंदूर से लिखे गए ‘श्री गणेशाय नम:, स्वास्तिक, शुभ-लाभ’ जैसे मांगलिक मंत्र
प्रयागराज। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर रविवार को दीपपर्व दीपावली धूमधाम से मनाई गई। शुभ मुहूर्त में धन, ऐश्वर्य के साथ ही सर्वमंगल की कामना से घरों के साथ ही व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी लक्ष्मी-गणेश और इंद्र-कुबेर का पूजन किया गया। अबकी स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजा के लिए तीन मुहूर्त रहे और तीनों ही गृहस्थों एवं कारोबारियों, दोनों के लिए शुभतादायी रहे।
अमावस्या तिथि रविवार को दिन में 11.51 बजे से आरंभ हुई जो सोमवार को सुबह 9.44 बजे तक रहेगी। रविवार को प्रदोष काल शाम 5.11 बजे से शाम 7.48 बजे तक रहा। लेकिन, प्रदोष काल व्यापिनी स्थिर लग्न वृष शाम 6.21 बजे से रात 8.18 बजे तक रहा, ऐसे में ज्यादातर लोगों ने अमावस्या, प्रदोष काल के उत्तम योग में इसी अवधि में लक्ष्मी-गणेश, इंद्र, कुबेर की पूजा की। नए कामों के श्रीगणेश के साथ ही बही खातों का पूजन भी किया गया। इससे पहले स्थिर लग्न कुंभ में दिन में 1.44 से 3.15 बजे के बीच भी पूजा की गई।
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ज्यादातर श्रद्धालुओं ने अमवास्या पर ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्यै नम:’ मंत्र जाप के साथ लक्ष्मी पूजन किया। घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दीवार या तिजोरी पर रोली या सिंदूर से ‘श्री गणेशाय नम:, स्वास्तिक, शुभ-लाभ’ जैसे मांगलिक मंत्र भी लिखे गए। लक्ष्मी को गेंदा के साथ ही कमल के फूल भी चढ़ाए गए। वहीं तांत्रिक उपासकों ने अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल और स्थिर लग्न सिंह में रात 11.50 बजे से भोर में 3.04 बजे के बीच साधना की। यह मुहूर्त कालीपूजा के लिए भी सर्वोत्तम रहा। परंपरा के मुताबिक पूजन स्थल के पास दीपक से काजल भी उतारा गया।

Laxmi Ganesh Pooja on Diwali- फोटो : CITY DESK
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