कुंभ मेले में मौनी अमावस्या पर महास्नान के लिए देश के हर कोने से श्रद्धालु संगमनगरी की ओर खींचे चले आ रहे हैं। कुंभ में मौनी अमावस्या का महास्नान सोमवार को है, लेकिन संगम की रेती पर शनिवार से ही आस्था हिलोर ले रही है। रविवार की सुबह से शहर की सड़कें स्नानार्थियों की भीड़ से पट गई है। दिन के 1 बजे तक 70 लाख लोगों ने संगम में डुबकी लगा ली है।
(सभी तस्वीरें:- अनिरूद्ध पांडे)
इलाहाबाद जंक्शन, सिटी स्टेशन, प्रयाग और प्रयाग घाट स्टेशनों से निकल रही भीड़ संगम का रुख कर रही है। नैनी, छिवकी और झूंसी रेलवे स्टेशन भी श्रद्धालुओं से भरी पड़ी है। सिविल लाइंस बस अड्डा हो अथवा नैनी और झूंसी में बनाए गए अस्थायी बस अड्डे सभी जगह श्रद्धालुओं से पट गई है। शहर से लेकर कुंभ मेला के प्रवेश मार्गों तक और फिर मेला क्षेत्र के अंदर सीर पर गठरी ही गठरी ही दिखाई दे रही है। यही गठरी कुंभ की पहचान है और मेले की रंगत भी।
इस कुंभ में आस्था और अध्यात्म के साथ आधुनिकता का भी संगम हो रहा है। भव्य और दिव्य कुंभ में काफी बदलाव दिख रहा है। नहीं बदली तो वह गठरी, जो मेले की रौनक है। मेला प्रशासन को अनुमान है कि लगभग साढ़े तीन करोड़ लोग सोमवार को संगम की रेती पर पहुंचेंगे। शहर की सड़कों से लेकर मेला तक मौनी अमावस्या पर आस्था का ऐसा जमघट लगा है कि कुंभ की और दिव्यता चारों ओर निखरने लगी है। गठरी लिए इन श्रद्धालुओं को न तो किसी व्यवस्था से मतलब होता है और न ही रोशनी से नहाई सड़कों से। अगाध आस्था में डूबे गठरी वाले श्रद्धालु पावन संगम पहुंचते हैं और आस्था की डुबकी लगाकर वापस अपने घर चले जाते हैं।
फाफामऊ से अरैल के बीच सभी 22 पांटून पुलों पर लंबी कतारें सुबह से देर रात तक लगी रहीं। सोमवार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आने के मद्देनजर इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।करीब 32 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे मेला क्षेत्र का नजारा शनिवार की शाम को ही बदल गया। हर तरफ सिर पर गठरी और हाथों में अपनों का हाथ थामे बढ़ते श्रद्धालुओं का रेला दिखने लगा।
फाफामऊ, शिवकुटी, नागवासुकि, बख्शी बांध, दारानगर, बेनी बांध के अलावा नैनी ब्रिज से कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचने वाले रास्तों पर लोग पैदल आगे बढ़ने की जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। कुछ श्रद्धालु बच्चों को कंधे पर बैठाए तो कुछ बुजुर्ग लाठी लेकर संगम तट की ओर बढ़ते जा रहे हैं।