मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के शाही स्नान की तैयारियां पूरी कर ली गईं। कुंभ के इस दूसरे शाही स्नान पर सनातनी संस्कृति,संस्कार और परंपरा का एक बार फिर त्रिवेणी तट पर संगम दुनिया के लिए देखने लायक होगा। सभी 13 अखाड़ों के शिविरों से निकलने के क्रम के साथ ही स्नान का समय निर्धारित कर दिया गया। चार फरवरी की भोर में 5:15 बजे से शाही स्नान के लिए सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े की शोभायात्रा निकलेगी।
शाही स्नान के लिए अखाड़ों, खालसों से जुड़े देश-दुनिया भर से संत प्रयागराज पहुंच गए है। कोई डमरू-त्रिशूल लेकर तो कोई भस्म-भभूत पोतकर शाही स्नान के लिए निकलेगा। शाही स्नान की झलक पाने के लिए हर किसी को इंतजार है। बाजेगाजे के साथ चार फरवरी की सुबह सेक्टर-16 स्थित शिविर से महानिर्वाणी के पीछे अटल अखाड़े के संन्यासी और नागाओं की शोभायात्रा शाही स्नान के लिए निकलेगी। इनके बाद निरंजनी अखाड़ा और आनंद अखाड़ा के संन्यासी शाही स्नान के लिए जाएंगे।
फिर, जूना अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा और आवाहन अखाड़े के संतों की शोभायात्राएं रथों, बग्घियों से संगम नोज के लिए निकलेंगी। इनके बाद दिन के 9:40 बजे से बैरागी परंपरा के संतों की शोभायात्राएं शाही स्नान के लिए निकलेंगी। इसमें निर्वाणी के बाद दिगंबर अखाड़ा और फिर निर्मोही अखाड़ा शामिल होगा।
इनके बाद उदासीन परंपरा के नया पंचायती अखाड़े के अलावा बड़ा पंचायती अखाड़ा और अंत में निर्मल अखाड़े के संत शाही स्नान के लिए जाएंगे। संगम नोज पर सुबह 6:15 से शाम 4:20 बजे तक शाही स्नान चलेगी। इस दौरान सबसे अधिक समय एक घंटे तक बड़ा पंचायती अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे। निर्वाणी और निर्मोही को सबसे कम 30-30 मिनट का समय शाही स्नान के लिए निर्धारित किया गया है।
दूसरे शाही स्नान मौनी अमवस्या के लिए हजारों की तादाद में संन्यासिनियां भी शाही स्नान करेंगी। इसके लिए पड़ोसी देश नेपाल से लेकर सात समंदर पार जर्मनी, इटली, कनाडा, आस्ट्रिया और रूस से भी बड़ी संख्या में विदेशी साध्वियां मौनी अमावस्या पर शाही स्नान के लिए पहुंची हैं।
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