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कुंभ 2019ः अखाड़ा के संतों ने संभाला धर्म संसद का ‘मंच’, अवधेशानंद मंदिर के लिए लगाएंगे ‘मौन’ डुबकी
Sat, 02 Feb 2019 02:22 PM IST
kapil kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: kapil kumar
Updated Sat, 02 Feb 2019 02:22 PM IST
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आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद
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विहिप के धर्म संसद में दूसरे दिन शुक्रवार को अखाड़ों के संत तथा पदाधिकारी शामिल हुए। इसमें जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर के अलावा कई अन्य संतों का नाम शामिल है। इसके माध्यम से यह दिखाने की भी कोशिश की गई कि अखाड़ा के संत राम मंदिर के मुद्दे पर धर्म संसद के मत के साथ हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्म संसद से अलग 21 फरवरी को अयोध्या कूच की घोषणा की है तो स्वामी निश्चलानंद ने भी धर्म संसद में शामिल होने से इंकार कर दिया।
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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि, महामंत्री स्वामी हरि गिरि ने भी धर्म संसद के बहिष्कार की घोषणा की थी। ऐसे में धर्म संसद में संतों की मौजूदगी पर सबकी नजर रही। निर्मोही अखाड़ा के सचिव रामजीदास, निर्वाणी के चिव गौरीशंकर दास, महानिर्वाणी के स्वामी विशोकानंद, निरंजनी के स्वामी बालकानंद, महामंडलेश्वर स्वामी वियोगानंद समेत अखाड़ों से जुड़े कई अन्य संत धर्म संसद में पहुंचे और अयोध्या मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। इन संतों ने प्रस्ताव पर अपने विचार भी रखे।
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विहिप के धर्म संसद में पहुंचे जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने राम मंदिर मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर संतों का समर्थन मांगा। उन्होंने आगामी चुनाव में भाजपा के समर्थन की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का आंदोलन काफी आगे बढ़ चुका है।
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यह युद्ध निर्णायक दौर में है और अब कुछ महीने ही हैं। अपना अध्यात्मिक बल दीजिए। आने वाली सरकार राम मंदिर का निर्माण कराए इस अपील के साथ अनुष्ठान की भी जरूरत है। उन्हाेंने श्री राम जय राम जय जय राम की जाप करने की अपील की। घोषणा की कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ वह मौनी अमावस्या स्नान करेंगे।