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सहज और भोलेपन से ही परमात्मा का मिलन : आचार्य शान्तनु

Tue, 29 Jan 2019 07:18 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Tue, 29 Jan 2019 07:18 PM IST
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kumbh 2019: Acharya Shantanu maharaj katha in kumbh mela prayagraj
आचार्य शान्तनु
दिव्य प्रेम सेवा के प्रख्यात कथावाचक आचार्य शान्तनु जी महाराज ने  रघुवंश की माताओं का चरित्र सुनाते हुए मां कौशल्या, सुमित्रा,  मां जानकी एवं उर्मिला जी के चरित्र का मार्मिक वर्णन किया और  कहां यह देश यह धर्म संस्कृति यदि सुरक्षित है इन्हीं माताओं और बहनों के कारण जिन्होंने अपने पुत्रों को अपने भाइयों को अपने बेटों को तिलक लगाकर धर्म की रक्षा के लिए भेज दिया।  
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आचार्य शान्तनु

kumbh 2019: Acharya Shantanu maharaj katha in kumbh mela prayagraj
आचार्य शान्तनु
सेक्टर 15 में स्थित दिव्य सेवा प्रेम मिशन के तत्वाधान मे चल रही कथा के दौरान उन्होने कथा मेंं बताया कि जब भगवान मां जानकी लक्ष्मण जी के साथ उनके लिए निकले पूरी अयोध्या मां कैकेई को धिक्कार देते हुए साथ चल पड़े यही तो अयोध्या वासियों का भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण है ।
 
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आचार्य शान्तनु

kumbh 2019: Acharya Shantanu maharaj katha in kumbh mela prayagraj
आचार्य शान्तनु
केवट प्रसंग को सुनाते हुए  कहा यदि परमात्मा से मिलन करना हो एकदम सरल सहज और भोले हो जाइए भोले भक्ति को परमात्मा बहुत पसंद करता है केवट भगवान से चरण धुलवा कर पार उतारने की बात करता है यही तो भक्त और भगवान के बीच का संबंध है केवट भगवान से अनेक तर्क करता है कि प्रभु मैं आपसे रोना इसलिए रोपा रहा हूं क्योंकि आप दयालु भक्तों के रुदन बर्दाश्त नहीं कर पाते।
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आचार्य शान्तनु

kumbh 2019: Acharya Shantanu maharaj katha in kumbh mela prayagraj
आचार्य शान्तनु
इसलिए महाराज श्री ने बताया रूदन ही वह भक्ति मार्ग की साधना है जो भगवत मिलन करा देती है केवट की नाव से भगवान ने गंगा पार की और केवट को उतर आए देना चाहा लेकिन केवट ने मना कर दिया कि मैं बचने से विमुख नहीं हो सकता और भेज देना ही चाहते हो लौट कर जब आओगे तब भगवान तब दे देना जो दोगे हम ले लेंग केवल भगवान को गंगा पार करता है बहुत देना चाहते हैं लेकिन केवट ने कुछ नहीं लिया और जो भगवान से कभी नहीं लेता भगवान उसके ऋणी हो जाते हैं।
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