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मुखबिरी के शक में हुई थी कौशलेश की हत्या
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Kaushlesh was murdered on suspicion of whistleblowing
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प्रयागराज। करछना के मड़वा निवासी कौशलेश यादव की हत्या मुखबिरी के शक में हुई थी। एक दिन पहले पकड़े गए दिनेश यादव ने पूछताछ में इस बात का खुलासा किया है कि कौशलेश की मुखबिरी पर ही राजा पांडेय व उसके साथियों ने उस पर जानलेवा हमला किया था। दिनेश के साथ उसके दो साथी भी पकड़े गए, जिन्हें एसटीएफ ने जेल भेज दिया।
एसटीएफ ने बताया कि पूछताछ में दिनेश ने बताया कि वह कभी राजा पांडेय के संग रहे विजय पांडेय निवासी वीरपुर का साथी है। पांच साल पहले चचेरे भाई विमल पांडेय की हत्या में विजय गवाह है। हत्यारोपी करन पांडेय, प्रांजल व हिमांशु शुक्ला की जेल जाने के दौरान शातिर राजा पांडेय से जान पहचान हो गई। जिसके बाद राजा ने विजय पर गवाही न देने का दबाव बनाया।
जमानत पर छूटने के बाद राजा ने विजय के पिता को सरेआम बेइज्जत किया जिसके बाद विजय के साथ मिलकर उसने राजा को गोली मार दी थी, जिसमें वह कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। इस घटना के बाद से विजय का वर्चस्व जम गया और वह रंगदारी, अवैध वसूली करने लगा। उधर, स्वस्थ होने के बाद राजा ने भी वसूली करनी चाही, जिसके बाद दोनों के बीच रंजिश हो गई। इसी दौरान एक दिन विजय को मारने पहुंचे राजा ने उसके नहीं मिलने पर उसके पिता लालता प्रसाद पांडेय को गोलियों से भून दिया था। पकड़े गए दिनेश ने बताया कि इसके बाद राजा ने उस पर भी हमला किया, जिसमें वह बाल-बाल बच गया। इसमें राजा के लिए मुखबिरी कौशलेश ने की थी और इसीलिए उसने अपने तीन साथियों व विजय पांडेय की मदद से मई में उसकी हत्या कर दी।
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एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में दिनेश ने बताया है कि उस पर हमले में राजा के साथ शिवा कुशवाहा, राजू पासी, मंगला पासी व बजरंगी पटेल शामिल थे, जिन्हें मारने की योजना बनाई थी। इसी क्रम में शनिवार को शिवा को मारने की तैयारी थी, जिसके लिए वह शशिकांत पाल उर्फ बब्बे व निर्मल कुमार यादव निवासी सरायममरेज के साथ भीरपुर रेलवे स्टेशन पर विजय का इंतजार कर रहा था। तभी सटीक मुखबिर पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से तीन तमंचा, छह कारतूस, दो मोबाइल, दो आधार, एक एटीएम व एक पैन कार्ड बरामद हुआ।
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एसटीएफ ने बताया कि पूछताछ में दिनेश ने बताया कि वह कभी राजा पांडेय के संग रहे विजय पांडेय निवासी वीरपुर का साथी है। पांच साल पहले चचेरे भाई विमल पांडेय की हत्या में विजय गवाह है। हत्यारोपी करन पांडेय, प्रांजल व हिमांशु शुक्ला की जेल जाने के दौरान शातिर राजा पांडेय से जान पहचान हो गई। जिसके बाद राजा ने विजय पर गवाही न देने का दबाव बनाया।
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जमानत पर छूटने के बाद राजा ने विजय के पिता को सरेआम बेइज्जत किया जिसके बाद विजय के साथ मिलकर उसने राजा को गोली मार दी थी, जिसमें वह कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। इस घटना के बाद से विजय का वर्चस्व जम गया और वह रंगदारी, अवैध वसूली करने लगा। उधर, स्वस्थ होने के बाद राजा ने भी वसूली करनी चाही, जिसके बाद दोनों के बीच रंजिश हो गई। इसी दौरान एक दिन विजय को मारने पहुंचे राजा ने उसके नहीं मिलने पर उसके पिता लालता प्रसाद पांडेय को गोलियों से भून दिया था। पकड़े गए दिनेश ने बताया कि इसके बाद राजा ने उस पर भी हमला किया, जिसमें वह बाल-बाल बच गया। इसमें राजा के लिए मुखबिरी कौशलेश ने की थी और इसीलिए उसने अपने तीन साथियों व विजय पांडेय की मदद से मई में उसकी हत्या कर दी।
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एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में दिनेश ने बताया है कि उस पर हमले में राजा के साथ शिवा कुशवाहा, राजू पासी, मंगला पासी व बजरंगी पटेल शामिल थे, जिन्हें मारने की योजना बनाई थी। इसी क्रम में शनिवार को शिवा को मारने की तैयारी थी, जिसके लिए वह शशिकांत पाल उर्फ बब्बे व निर्मल कुमार यादव निवासी सरायममरेज के साथ भीरपुर रेलवे स्टेशन पर विजय का इंतजार कर रहा था। तभी सटीक मुखबिर पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से तीन तमंचा, छह कारतूस, दो मोबाइल, दो आधार, एक एटीएम व एक पैन कार्ड बरामद हुआ।