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Kaushambi Blast : बारूद मिक्सिंग में लापरवाही भी हो सकती है विस्फोट की वजह, सल्फर-फास्फोरस से भड़की आग

Mon, 26 Feb 2024 03:25 PM IST
विनोद सिंह आलोक श्रीवास्तव, प्रयागराज
आलोक श्रीवास्तव, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Feb 2024 03:25 PM IST
सार

पटाखा फैक्ट्री में भारी मात्रा में बारूद स्टोर किया गया था। इसमें सल्फर व फास्फोरस जैसे अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल भी थे। इसके अलावा भारी मात्रा में छोटे-छोटे कंटेनरों में ग्लू भी रखा था। ग्लू का इस्तेमाल पटाखे बनाने में किया जाता है।

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Kaushambi Blast: Carelessness in mixing gunpowder can also be the reason for the explosion
पटाखे बनाने के सामान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरवारी में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट का स्पष्ट कारण जनरेटर की चिंगारी है या कुछ और, यह तो विस्तृत जांच से ही सामने आ सकेगा। हालांकि, मौके की स्थतियां और प्रारंभिक जांच पड़ताल के बाद ऐसी आशंका भी जताई जा रही है कि बारूद मिक्सिंग के दौरान विस्फोट हुआ और फिर वहां रखे सल्फर-फास्फोरस के चलते आग भड़क उठी। रही सही कसर छोटे कंटेनरों में रखे ग्लू ने पूरी कर दी जिसके चलते आग ने मिनटों में पूरी फैक्ट्री को चपेट में ले लिया।

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सूत्रों का कहना है कि पटाखा फैक्ट्री में भारी मात्रा में बारूद स्टोर किया गया था। इसमें सल्फर व फास्फोरस जैसे अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल भी थे। इसके अलावा भारी मात्रा में छोटे-छोटे कंटेनरों में ग्लू भी रखा था। ग्लू का इस्तेमाल पटाखे बनाने में किया जाता है। पटाखों के लिए प्लास्टिक पाइप के छोटे-छोटे टुकड़े और भारी मात्रा में कागज, धागे आदि भी स्टोर किए गए थे।

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि पटाखा बनाने के दौरान बारूद की मिक्सिंग के दौरान ही विस्फोट हुआ। इसके बाद सल्फर-फास्फोरस जैसे केमिकल के चलते ही आग भड़क उठी।इसके बाद भारी मात्रा में रखे ग्लू के चलते आग बहुत तेजी से फैली और देखते ही देखते इसने पूरी फैक्ट्री को चपेट में ले लिया। उधर, प्लास्टिक पाइप के टुकड़ों व कागज भी आग के विकराल रूप लेने का कारण बने।

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पानी की बौछार पर और भड़की आग

विस्फोट के बाद चौतरफा लगी आग पर काबू पाने में घंटों का समय लगने का एक कारण फैक्ट्री में भारी मात्रा में केमिकल स्टोर किया जाना भी रहा। दरअसल मौके पर पहुंचे फायरब्रिगेड कर्मचारियों ने तत्काल पानी की बौछार डालकर आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की। हालांकि तब तक काफी मात्रा में केमिकल फैक्ट्री में फैल चुका था। इसके बाद आग बुझाने के लिए फोम मंगाया गया। फोम आने के बाद आग बुझाने पर प्रभावी तरीके से काबू पाने का काम शुरू हो सका।

सात फायर टेंडरों से पांच घंटे चला ऑपरेशन

विस्फोट के बाद पटाखा फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाने में कुल पांच घंटे का समय लगा। इस दौरान सात फायर टेंडरों से लगातार राहत कार्य किया गया। इनमें से चार फायर टेंडर कौशाम्बी जबकि एक फायर टेंडर फतेहपुर व दो फायर टेंडर प्रयागराज से मंगाए गए थे। मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव पांडेय ने बताया कि फायर ब्रिगेड की अलग-अलग टीमों ने दोपहर 12 से शाम पांच बजे तक लगातार पांच घंटों तक ऑपरेशन चलाया और तब जाकर आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।

क्यों रखे थे एलपीजी सिलेंडर?

घटना के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या फैक्ट्री में एलपीजी सिलेंडर भी इस्तेमाल में लाए जा रहे थे। दरअसल सूत्रों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान फैक्ट्री के भीतर एलपीजी सिलेंडर के अवशेष भी मिले। यही नहीं कुछ एलपीजी सिलेंडर भी पाए गए हैं। गनीमत यह रही कि राहत कार्य के दौरान इन सिलेंडरों में विस्फोट नहीं हुआ। वरना नुकसान और ज्यादा हो सकता था।

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