{"_id":"eb03c58ec6319067cc474398cf029acc","slug":"kajal-with-best-wishes-welcome-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काजल! शुभकामनाओं के साथ तुम्हारा स्वागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काजल! शुभकामनाओं के साथ तुम्हारा स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 27 Jun 2015 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। सामाजिक सरोकारों के लिए प्रतिबद्धता के तहत तकरीबन चार माह पहले ‘अमर उजाला’ ने जो संकल्प लिया था, वह सार्थक और सुखद रूप में पूरा हुआ। गंभीर हृदयरोग से पीड़ित अतरसुइया के अखाड़ा मान की गली में रहने वाली सत्रह बरस की काजल पूरी तरह से स्वस्थ होकर शुक्रवार को माता-पिता के साथ ‘अमर उजाला’ दफ्तर पहुंची तो जहां काजल और उसके माता-पिता के मन में ‘अमर उजाला’ के प्रति कृतज्ञता का भाव था, वहीं ‘अमर उजाला’ परिवार ने भी शुभकामनाओं के साथ उसका स्वागत किया। संपादक डॉ.सचिन शर्मा ने काजल को बुके देते हुए उसके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की।
बीती तेरह फरवरी को ‘अमर उजाला’ को खबर मिली थी कि हार्ट में गंभीर संक्रमण फैलने से हंसती-खेलती काजल चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गई है। वह गुमसुम सी बिस्तर पर लेटी रहती है। पिता राकेश कुमार श्रीवास्तव और मां उषा ने उसे पहले एसआरएन अस्पताल में दिखाया जहां डॉक्टरों ने उसे संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एसजीपीजीआई) के लिए रेफर कर दिया। यहां हार्ट की सर्जरी के लिए डॉक्टरों ने तकरीबन तीन लाख रुपये का खर्च बताया जो सिलाई-कढ़ाई करके गृहस्थी चलाने वाले राकेश के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। पड़ोसियों धीरज साहू, विकास चौहान, संजय खन्ना आदि की मदद से सांसद श्यामाचरण गुप्त से गुहार के बाद पीएम राहतकोष से पचास हजार रुपये की मदद तो मिली लेकिन अब भी दरकार थी कि तीन लाख का लक्ष्य पूरा हो तो काजल की जिंदगी बचे।
‘अमर उजाला’ ने काजल की मदद के लिए मुहिम की शुरुआत की। ‘कोशिश कीजिए, बच जाए काजल की जिंदगी’ की अपील के साथ खबर छपी तो छात्रों से लेकर नौकरीपेशा और रिटायर्ड लोगों से लेकर कई कारोबारियों तक ने मुहिम का स्वागत करते हुए मदद के लिए हाथ बढ़ाया। फिर क्या, हर दिन बढ़ती मदद की राशि से तेरहवें दिन तीन लाख रुपये का लक्ष्य पूरा हो गया। हर तरह की मदद के साथ ‘अमर उजाला’ इलाज के दौरान एसजीपीजीआई में भी साथ रहा। सभी की दुआएं रंग लाईं सफल ऑपरेशन और तकरीबन महीने भर डॉक्टरों की निगरानी के बाद काजल स्वस्थ होकर घर लौटी और शुक्रवार को माता-पिता के साथ अमर उजाला दफ्तर भी। अपने तमाम पाठकों के साथ ‘अमर उजाला’ की ओर से काजल को बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य के लिए अनगिनत शुभकामनाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीती तेरह फरवरी को ‘अमर उजाला’ को खबर मिली थी कि हार्ट में गंभीर संक्रमण फैलने से हंसती-खेलती काजल चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गई है। वह गुमसुम सी बिस्तर पर लेटी रहती है। पिता राकेश कुमार श्रीवास्तव और मां उषा ने उसे पहले एसआरएन अस्पताल में दिखाया जहां डॉक्टरों ने उसे संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एसजीपीजीआई) के लिए रेफर कर दिया। यहां हार्ट की सर्जरी के लिए डॉक्टरों ने तकरीबन तीन लाख रुपये का खर्च बताया जो सिलाई-कढ़ाई करके गृहस्थी चलाने वाले राकेश के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। पड़ोसियों धीरज साहू, विकास चौहान, संजय खन्ना आदि की मदद से सांसद श्यामाचरण गुप्त से गुहार के बाद पीएम राहतकोष से पचास हजार रुपये की मदद तो मिली लेकिन अब भी दरकार थी कि तीन लाख का लक्ष्य पूरा हो तो काजल की जिंदगी बचे।
विज्ञापन
‘अमर उजाला’ ने काजल की मदद के लिए मुहिम की शुरुआत की। ‘कोशिश कीजिए, बच जाए काजल की जिंदगी’ की अपील के साथ खबर छपी तो छात्रों से लेकर नौकरीपेशा और रिटायर्ड लोगों से लेकर कई कारोबारियों तक ने मुहिम का स्वागत करते हुए मदद के लिए हाथ बढ़ाया। फिर क्या, हर दिन बढ़ती मदद की राशि से तेरहवें दिन तीन लाख रुपये का लक्ष्य पूरा हो गया। हर तरह की मदद के साथ ‘अमर उजाला’ इलाज के दौरान एसजीपीजीआई में भी साथ रहा। सभी की दुआएं रंग लाईं सफल ऑपरेशन और तकरीबन महीने भर डॉक्टरों की निगरानी के बाद काजल स्वस्थ होकर घर लौटी और शुक्रवार को माता-पिता के साथ अमर उजाला दफ्तर भी। अपने तमाम पाठकों के साथ ‘अमर उजाला’ की ओर से काजल को बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य के लिए अनगिनत शुभकामनाएं।
विज्ञापन