न्यायमूर्ति विक्रमनाथ बोले : इलाहाबाद हाईकोर्ट में हो रहा बेहतर काम, टीआरपी की कमी
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का काम बेहतर है। बस टीआरपी की कमी से यहां के अच्छे काम आम लोगों की जानकारी में नहीं आ पाते हैं। इससे ऐसा लगता है कि यहां कुछ काम ही नहीं होता है, जबकि हकीकत इसके विपरीत है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में शुक्रवार को एडवोकेट्स एसोसिएशन ने 50 साल से अधिक वकालत कर चुके अधिवक्ताओं के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का काम बेहतर है। बस टीआरपी की कमी से यहां के अच्छे काम आम लोगों की जानकारी में नहीं आ पाते हैं। इससे ऐसा लगता है कि यहां कुछ काम ही नहीं होता है, जबकि हकीकत इसके विपरीत है।
साथ ही उन्होंने कहा कि कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट में एक-दो केसों में किसी कमी की वजह से आलोचना होती है तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, यहां कि ज्यूडिशियल प्रैक्टिस बहुत ही बेहतर है। अधिवक्ता काम अपनी रफ्तार से करें, लेकिन टीआरपी भी हासिल करें। काम से उनकी पहचान बढ़ेगी तो इलाहाबाद हाईकोर्ट भी गौरवान्वित होगा। इलाहाबाद मेरा घर है, यहां के अधिवक्ताओं के लिए पूरा सहयोग रहेगा।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्क कल्चर की सराहना की। कहा कि यहां कि ड्राफ्टिंग व प्लीडिंग बेजोड़ है। उन्होंने भी अधिवक्ताओं से टीआरपी हासिल करने की जरूरत बताई। कहा कि यहां मुकदमों का बोझ अधिक है और उसी के अनुसार काम भी हो रहा है, लेकिन उसे पूरी पहचान नहीं मिल पा रही है। उस पहचान को बनाने के लिए काम करने की जरूरत है। उन्होंने नए अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से सीखने की जरूरत बताई।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने नए अधिवक्ताओं के लिए सीख दी। कहा कि आजकल नए अधिवक्ताओं में वरिष्ठों के प्रति उपेक्षात्मक रवैया देखने को मिल रहा है, जो सही नहीं है। युवाओं को अपने वरिष्ठों के साथ बैठकर परंपरागत ज्ञान का हासिल करना चाहिए।
इसके पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने भी अपनी बात रखी। कहा कि इलाहाबाद जितना यहां के लोगों का है उतना ही उनका भी है। उन्होंने भी युवा अधिवक्ताओं को वरिष्ठों से सीखने की जरूरत बताई।
कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने किया, जबकि संचालन महासचिव देश रतन चौधरी ने किया। इस दौरान न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति विवेक बिरला, न्यायमूर्ति अजय भनोट, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ, न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित, इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक राजीव भारती आदि रहे।
इन अधिवक्ताओं को किया गया सम्मानित
अनिल प्रकाश माथुर, अवधेश कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता भगवती प्रसाद सिंह, ब्रह्मपाल मलिक (आए नहीं थे बेटे अमित ने सम्मान लिया), वरिष्ठ अधिवक्ता धर्म पाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी, कृष्ण मोहन, प्रबोध गौर, राकेश कुमार सिंह, रामेंद्र अस्थाना, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी, श्याम सुंदर त्रिपाठी, वजाह हुसैन खान को साल, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अधिवक्ता रमेश कुमार सक्सेना, विद्या भूषण, एमडी शेखर निजी कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।