जवाहर तारामंडल : आधे से ज्यादा प्रोजेक्टर खराब, कंट्रोल यूनिट और 35 प्रोजेक्टर बदलने आएगा नौ करोड़ का खर्च
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन परिसर में ही यह तारामंडल बना है। यह मुंबई, दिल्ली और बंगलूरू के साथ देश के उन चार तारामंडलों में से एक है, जो प्रथम प्रधानमंत्री के नाम से जाने जाते हैं।
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नक्षत्रों के रहस्यों से पर्दा उठाने वाले आनंद भवन के जवाहर प्लेनेटोरियम (तारामंडल) में एक तारा टूट गया है। यह तारा है... रोशनी का। 44 साल पुराने इस तारामंडल के आधे प्रोजेक्टर खराब हो चुके हैं। इस कारण शो के दौरान तारों की दास्तां सुनाई तो देती है, दिखता कुछ नहीं। अब तारामंडल प्रशासन ने 35 प्रोजेक्टर व कंट्रोल मशीन बदलने के लिए शासन से नौ करोड़ रुपये मांगे हैं।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन परिसर में ही यह तारामंडल बना है। यह मुंबई, दिल्ली और बंगलूरू के साथ देश के उन चार तारामंडलों में से एक है, जो प्रथम प्रधानमंत्री के नाम से जाने जाते हैं। आनंद भवन स्थित तारामंडल की स्थापना 1980 में हुई थी। इसका उद्देश्य खगोल विज्ञान को बढ़ावा देना तो है ही, खगोलीय पिंडों और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि जगाना भी है।
यहां रोजाना सात शो चलते हैं, जबकि रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ जाने के कारण नौ शो चलाए जाते हैं। 70 रुपये का टिकट है इसका। संगमनगरी घूमने के लिए देश भर से यहां लोग आते हैं। अधिकांश लोग नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक आवास भी देखने जाते हैं। वक्त होने पर तारामंडल भी देखते हैं। एक साल में यहां एक लाख से अधिक लोग आए हैं। इनमें स्कूली बच्चे अधिक हैं।
आजकल तारामंडल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। यहां आने वालों को सिर्फ तारों की कहानियां सुनाई देती हैं, दिखाई कुछ नहीं देता। कारण यह है कि यहां लगे 35 प्रोजेक्टर में से आधे अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इनसे तस्वीरें साफ नहीं दिखतीं। 40 मिनट तक अंधेरे चेंबर से जब लोग बाहर निकलते हैं तो खुद को ठगा पाते हैं। लोग यहां के कर्मचारियों से सवाल भी करते हैं, लेकिन वह मजबूरी गिना देते हैं।
तारामंडल प्रशासन का दावा है कि इसे नया स्वरूप देने के लिए नौ करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव भेजा है। इससे 35 प्रोजेक्टर और उन्हें कंट्रोल करने वाली मशीन बदली जाएगी। पर्दों को भी बदला जाएगा। यह काम महाकुंभ से पहले पूरा कर लेने की तैयारी है।
नाराजगी जताते हैं दर्शक
तारामंडल में दिखाए जा रहे शो में कुछ दिखता ही नहीं है। ग्रहों-उपग्रहों की चमक बेहद घट गई है। टिकट के नाम पर 70 रुपये बेवजह ही खर्च हो गए। - शिवानी पांडे, मम्फोर्डगंज
अंदर कुछ ठीक से दिखा ही नहीं। मिनट बर्बाद हो गए। दर्शकों को पहले से कुछ बताते भी नहीं हैं। जब प्रोजेक्टर खराब हैं तो इसे चला ही क्यों रहे हैं। - राबिया खातून, तेलियगंज
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अत्याधुनिक प्रोजेक्टर लगाकर तारामंडल को नया स्वरूप देने के लिए शासन को नौ करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। धन मिलते ही जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। महाकुंभ से पहले दिसंबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा। - डॉ. वाई रवि किरन, निदेशक, जवाहर प्लेनेटेरियम