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प्रयागराजः जवाहर हत्याकांड में करवरिया बंधुओं को उम्रकैद की सजा

Mon, 04 Nov 2019 04:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 04 Nov 2019 04:27 PM IST
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jawahar pandit murder case court sentence life imprisonment to karwariya brothers full update
जवाहर पंडित हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद - फोटो : अमर उजाला

प्रयागराज के चर्चित जवाहर यादव उर्फ पंडित हत्याकांड में इलाहाबाद की जिला अदालत ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया उनके भाई पूर्व विधायक उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया तथा रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त 1996 को पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की सिविल लाइंस इलाके में गोली मारकर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में करवरिया बंधुओं को नामजद किया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद करवरिया बंधु जब बाहर निकले तो उनके समर्थकों ने नारेबाजी की।

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इन धाराओं के तहत हुई सजा
धारा 302- उम्रकैद 1लाख जुर्माना
धारा 307- 10  वर्ष 50 हज़ार
धारा 147-  2 वर्ष 10 हजार
धारा 148- 3 वर्ष 20 हजार
सभी को कुल 7.20 लाख जुर्माना

अब तक हुई कार्यवाही
इस मामले में अदालत ने 31 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व भजपा विधायक उदय भान करवरिया और एमएलसी सूरज भान करवरिया तथा उनके रिश्तेदार रामचंद्र त्रिपाठी को हत्या, विधि विरुद्ध जमाव, सशस्त्र बल प्रयोग सहित तमाम धाराओं में दोषी करार दिया था। मगर  अदालत ने उस दिन सजा के बिंदु पर सुनवाई नहीं की थी। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए चार नवंबर की तिथि नियत की थी। जिसे सुनने के बाद अदालत ने आज करवरिया बंधुओं को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त 1996 को पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की सिविल लाइंस इलाके में गोली मारकर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में करवरिया बंधुओं को नामजद किया गया था।

पुलिस और सीबीसीआईडी द्वारा की गई लंबी जांच के बाद मुकदमे का विधिवत ट्रायल 2015 में शुरू हो सका। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने पक्ष को साबित करने के लिए साक्ष्यों और गवाहों को पेश किया।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने करवरिया बंधुओं को हत्या का दोषी  करार दिया है। वहीं, इस मामले में वादी विजमा यादव के वकील लल्लन यादव का कहना है कि अभियुक्तों के लिए अदालत से सख्त से सख्त सजा की मांग की जाएगी, क्योंकि इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी तथा दो लोग गंभीर घायल हुए थे। सार्वजानिक स्थान पर गोलियां चलाई गईं, जिससे आम लोगों में दहशत फैल गई थी।

जेल में कैदियों को पढ़ाएंगे करवरिया बंधु

सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव पंडित की हत्या में सिद्धदोष करार दिए गए करवरिया बंधुओं को सोमवार को निचली अदालत की ओर से सजा सुनाई गई। इसके साथ ही जेल के अंदर तीनों भाइयों से सिद्धदोष बंदियों की तरह क्या कार्य कराया जाएगा, इसका निर्णय रविवार को ही हो गया है।

जेल प्रशासन तीनों भाइयों कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया एवं सूरजभान करवरिया को अशिक्षित कैदियों को शिक्षित करने में लगाएगा। केंद्रीय कारागार नैनी के मालवीय सदन में रखे गए करवरिया बंधुओं की सजा का एलान सोमवार को हुआ। इसके साथ ही जेल प्रशासन भी अब उनके साथ अंडर ट्रायल कैदी के बजाय सिद्धदोष कैदियों की तरह कार्य कराने की तैयारी काफी दिनों से बना रहा था।

अभी तक यही मंथन चल रहा था कि तीनों भाइयों से कार्य क्या कराया जाए। इसके लिए गहन मंथन और तीनों भाइयों की शैक्षिक योग्यता को देखते हुए जेल प्रशासन ने उन्हें शिक्षण कार्य में लगाने का निर्णय लिया है। जेल प्रशासन की ओर से जेल के अंदर अल्पशिक्षित और अशिक्षित कैदियों एवं बंदियों शिक्षित करने के लिए करवरिया बंधुओं को लगाया जाएगा।

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आज से तीनों भाइयों को आवंटित होगा सिद्धदोष कैदी नंबर, लागू होंगे ड्रेस कोड

इलाहाबाद के इतिहास के चर्चित प्रकरणों के फैसलों में से एक जवाहर यादव हत्याकांड में सिद्धदोष करार दिए गए करवरिया बंधुओं का सोमवार से कैदी नंबर बदल जाएगा। अभी तक तीनों भाई विचाराधीन (अंडर ट्रायल) बंदी थे।

सोमवार को सजा का ऐलान होने के बाद सिद्धदोष कैदी(कन्विक्ट प्रिजन) के रूप में तीनों भाइयों के न केवल नंबर बदल दिए जाएंगे, बल्कि उनके लिए ड्रेस कोड भी बदला जाएगा। सजा का ऐलान होने के बाद तीनों भाइयों के लिए कुर्ता पायजामा का ड्रेस होगा।

सिद्धदोष कैदी रजिस्टर के सीरियल के आधार पर उनका नंबर भी बदल जाएगा। हालांकि अभी तक तीनों भाइयों का नाम बंदी नंबर रजिस्टर में था लेकिन सोमवार से उन्हें कैदी नंबर आवंटित कर दिया जाएगा। डीआईजी जेल वीआर वर्मा के मुताबिक किसी भी विचाराधीन कैदी को जब सजा होती है तो उसका एक अलग रजिस्टर होता है, जिसे कनविक्ट रजिस्टर कहते हैं। 

तीनों भाई उच्चशिक्षित हैं। इसलिए जेल प्रशासन ने आपस में बैठक करके यह निर्णय लिया है कि उन्हें अशिक्षित एवं अल्पशिक्षित कैदियों एवं बंदियों को शिक्षित करने में लगाया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।-हरिबक्श सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, नैनी, प्रयागराज

पॉश इलाके सिविल लाइंस में गरजी थी एके 47

जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या 13 अगस्त 1996 को शहर के सिविल लाइंस इलाके में कर दी गई थी। उस वक्त शाम के करीब साढ़े छह बजे थे। जवाहर यादव अपनी मारुति 800 कार से लाउदर रोड स्थित कार्यालय से अशोक नगर अपने घर जा रहे थे। हमलावर एक मारुति वैन में सवार थे। सभी एके-47 और अन्य घातक असलहों से लैस थे। 

जवाहर के भाई सुलाकी यादव ने करवरिया बंधुओं पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना की जांच शुरू में सिविल लाइंस पुलिस ने और उसके बाद सीबीसीआईडी की इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी शाखा से कराई गई। 

सीबीसीआईडी के आरोपपत्र दाखिल करने के बाद हाईकोर्ट के स्थगनादेश के चलते मुकदमे की कार्रवाई पर काफी समय तक रोक लगी रही। 2015 में हाईकोर्ट का स्थगन आदेश समाप्त होने के बाद इस मुकदमे में सुनवाई प्रारंभ हुई। उसी समय करवरिया बंधुओं को सरेंडर कर जेल जाना पड़ा। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में त्वरित सुनवाई करने और अनावश्यक तारीख ना लगाने का आदेश दिया था। लगभग 4 वर्ष चली नियमित सुनवाई के बाद अदालत ने गत दिनों अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसमें 31 अक्तूबर को दोष तय किया गया और 4 नवंबर को दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

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