जामताड़ा : जालसाजी के लिए खरीदा एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटाबेस
जामताड़ा के गिरोह ने साइबर अपराध के लिए एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस खरीदा था। यह डाटा बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया था। इस बात का खुलासा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए धीरज पांडेय ने पूछताछ के दौरान किया।
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जामताड़ा के गिरोह ने साइबर अपराध के लिए एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस खरीदा था। यह डाटा बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया था। इस बात का खुलासा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए धीरज पांडेय ने पूछताछ के दौरान किया। खास बात यह कि उपलब्ध कराया गया ज्यादातर डाटा वरिष्ठ नागरिकों का था। जालसाजी के लिए जामताड़ा में बैठे अपराधी इसी डाटा बेस से निजी जानकारियां लेकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे।
धीरज को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इसी क्रम में उसने बताया कि जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधियों के पास लाखों बैंक ग्राहकों का निजी डाटा जैसे नाम, पता अकाउंट नंबर, पासबुक नंबर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर, इंटरनेट बैंकिंग यूजरआईडी आदि उपलब्ध है जिसे सुनकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। शुरुआत में वह कहता रहा कि डाटा बेस की व्यवस्था जामताड़ा गिरोह के लोग अपने संपर्कों के जरिए करते हैं। लेकिन जब पुलिस ने उसके लैपटॉप की जांच पड़ताल शुरू की, तो उसमें एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस मिला।
सख्ती से पूछताछ पर उसने बताया कि उसे यह डाट बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया है। पूछने पर उसका कहना था कि उसे जामताड़ा में बैठे गिरोह के सदस्यों ने नारायण का नंबर उपलब्ध कराया था। जिसके बाद उससे फोन पर ही बातचीत होती थी। उसका कहना था कि वह उससे मिल नहीं पाया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि हो सकता है कि डाटा बेस उपलब्ध कराने वाले युवक ने अपना सही नाम भी न बताया हो। फिलहाल उसका पता लगाया जा रहा है। उसके पकड़े जाने के बाद ही इस बात की जानकारी मिल सकेगी कि उसे बैंक ग्राहकों का डाटा बेस किसने उपलब्ध कराया। पुलिस अफसरों ने बताया कि धीरज केलैपटॉप व मोबाइल में सैकड़ों लोगों के पैन, आधार कार्ड की कॉपी व फोटो भी मिले हैं।