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जामताड़ा : जालसाजी के लिए खरीदा एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटाबेस

Wed, 23 Jun 2021 08:41 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 23 Jun 2021 08:41 AM IST
सार

जामताड़ा के गिरोह ने साइबर अपराध के लिए एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस खरीदा था। यह डाटा बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया था। इस बात का खुलासा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए धीरज पांडेय ने पूछताछ के दौरान किया।

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Jamtara: Database of one lakh bank customers bought for forgery
cyber crime

विस्तार

जामताड़ा के गिरोह ने साइबर अपराध के लिए एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस खरीदा था। यह डाटा बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया था। इस बात का खुलासा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए धीरज पांडेय ने पूछताछ के दौरान किया। खास बात यह कि  उपलब्ध कराया गया ज्यादातर डाटा वरिष्ठ नागरिकों का था। जालसाजी के लिए जामताड़ा में बैठे अपराधी इसी डाटा बेस से निजी जानकारियां लेकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे।

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धीरज को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इसी क्रम में उसने बताया कि जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधियों के पास लाखों बैंक ग्राहकों का निजी डाटा जैसे नाम, पता अकाउंट नंबर, पासबुक नंबर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर, इंटरनेट बैंकिंग यूजरआईडी आदि उपलब्ध है जिसे सुनकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। शुरुआत में वह कहता रहा कि डाटा बेस की व्यवस्था जामताड़ा गिरोह के लोग अपने संपर्कों के जरिए करते हैं। लेकिन जब पुलिस ने उसके लैपटॉप की जांच पड़ताल शुरू की, तो उसमें एक लाख बैंक ग्राहकों का डाटा बेस मिला।

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Jamtara: Database of one lakh bank customers bought for forgery
fraud - फोटो : demo pic

सख्ती से पूछताछ पर उसने बताया कि उसे यह डाट बेस वाराणसी के नारायण सिंह ने उपलब्ध कराया है। पूछने पर उसका कहना था कि उसे जामताड़ा में बैठे गिरोह के सदस्यों ने नारायण का नंबर उपलब्ध कराया था। जिसके बाद उससे फोन पर ही बातचीत होती थी। उसका कहना था कि वह उससे मिल नहीं पाया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि हो सकता है कि डाटा बेस उपलब्ध कराने वाले युवक ने अपना सही नाम भी न बताया हो। फिलहाल उसका पता लगाया जा रहा है। उसके पकड़े जाने के बाद ही इस बात की जानकारी मिल सकेगी कि उसे बैंक ग्राहकों का डाटा बेस किसने उपलब्ध कराया। पुलिस अफसरों ने बताया कि धीरज केलैपटॉप व मोबाइल में सैकड़ों लोगों के पैन, आधार कार्ड की कॉपी व फोटो भी मिले हैं।

Jamtara: Database of one lakh bank customers bought for forgery
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

जामताड़ा का धर्मेंद्र था मीडिएटर

धीरज ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि वह जामताड़ा गिरोह के सदस्यों में से केवल धर्मेंद्र उर्फ बाबू को जानता है। धर्मेंद्र ने ही उसका संपर्क फोन के जरिए नारायण से कराया। लोगों के खातों से रुपये उड़ाए जाने की जानकारी धर्मेद्र ही उसे व राहुल को देता था जिसकेबाद वह रुपये ऑनलाइन मोड से ही बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। जिसे जामताड़ा में बैठे गिरोह के सदस्य मनी वालेट में डालकर ऑनलाइन खरीदारी करते थे या फिर डिजिटल पेमेंट बैंक के जरिए नगद भुगतान करा लेते थे।
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