फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   It took 32 years for murder arrest

32 साल बाद मिली हत्या के आरोप से निजात

Tue, 17 Feb 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Tue, 17 Feb 2015 11:47 PM IST
विज्ञापन
It took 32 years for murder arrest
फतेहपुर के कोतवाली थानाक्षेत्र में 33 साल पूर्व हुई हत्या की वारदात में उम्रकैद की सजा पाए अभियुक्त राजेंद्र सिंह को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। फतेहपुर की सेशन कोर्ट ने उसे और उदय कुमार सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोनों ने हाईकोर्ट मेें अपील दाखिल की थी। राजेंद्र कुमार को संदेह का लाभ मिला, जबकि उदय के खिलाफ मजबूत साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने उसकी सजा बरकरार रखी है। अभियुक्तों की अपील पर न्यायमूर्ति अमर सरन और न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की खंडपीठ ने सुनवाई की।
विज्ञापन


अपील पर सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि अभियुक्त राजेंद्र कुमार की घटना स्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है। उसके पास न तो कोई बरामदगी है और न ही किसी अन्य साक्ष्य से उसके घटना स्थल पर मौजूद होने का प्रमाण मिलता है। घटना के तथ्यों के अनुसार अभियुक्त राजेंद्र सिंह उर्फ रजौला के पिता अमर सिंह की वर्ष 1980 में हत्या हुई थी। इस घटना में प्रताप सिंह को उम्रकैद की सजा हुई। प्रताप ने हाईकोर्ट में अपील की और जमानत पर जेल से बाहर आ गया।
विज्ञापन


आरोप है कि बदला लेने की नियत से अमर सिंह के पुत्र राजेंद्र सिंह, उदय कुमार सिंह और गया शंकर सिंह तथा दो अन्य लोग 14 जुलाई 1981 की रात करीब साढ़े नौ बजे जब प्रताप सिंह अपने पिता शिवसागर सिंह, भाई रामस्वरूप सिंह और अन्य लोगों के साथ कलेक्टर गंज स्थित अपने बहनोई के मकान में ऊपर के कमरे में बैठा था, तभी अभियुक्त वहां पहुंच गए। राजेंद्र और उदय के हाथ में बंदूकें थीं, जबकि उदय कुमार राइफल लिए था। उदय ने अपनी राइफल से खिड़की के बाहर से प्रताप सिंह पर फायर किया, मगर गोली सही निशाने पर न लगकर रामस्वरूप को लगी और उसकी घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


अभियोजन का मुख्य तर्क था कि कमरे में मौजूद चश्मदीद गवाहों ने पांचों अभियुक्तों को खिड़की के बाहर खड़े देखा था। खंडपीठ ने अभियोजन के इस तर्क को खारिज कर दिया, क्योंकि पांच लोग एक साथ खिड़की पर खड़े हों तो राइफल से किसी पर फायर करना संभव नहीं है। गोली चलाने के लिए कुछ स्थान चाहिए। अदालत ने राजेंद्र सिंह की उपस्थिति को संदिग्ध माना जबकि उदय सिंह के खिलाफ मजबूत साक्ष्य को देखते हुए उसकी सजा बहाल रखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed