हाईकोर्ट : योग्य डॉक्टरों का कुछ समय सरकारी अस्पतालों में सेवा देना मौजूदा हालात में जरूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आम जनता के हित को देखते हुए योग्य डॉक्टरों का कुछ समय सरकारी अस्पतालों में सेवा देना बेहद जरूरी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आम जनता के हित को देखते हुए योग्य डॉक्टरों का कुछ समय सरकारी अस्पतालों में सेवा देना बेहद जरूरी है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता डॉक्टरों की ओर से पूर्व में दी जा चुकी सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उनकी बची हुई सेवा तय कर दी है और स्पष्ट किया है कि इस अवधि को पूरा करने के बाद डॉक्टरों को बॉन्ड के सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने झांसी को कविता यादव और 6 अन्य की याचिका पर दिया।
यह मामला लखनऊ के केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान से वर्ष 2018-19 में पीजी करने वाले पांच डॉक्टरों से जुड़ा है। दाखिले के समय लागू शासनादेश के तहत डॉक्टरों ने दो साल सरकारी अस्पताल में काम करने का बॉन्ड भरा था, जिसमें यह भी व्यवस्था थी कि सुपर-स्पेशलिटी कोर्स में दाखिला मिलने पर उन्हें बॉन्ड से छूट मिलेगी। हालांकि, डॉक्टरों के सुपर-स्पेशलिटी डिप्लोमा में चयन के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2022 के नए आदेश का हवाला देते हुए उन्हें बॉन्ड से मुक्त करने से मना कर दिया था। याची डॉक्टरों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।