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अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं पेश करने का निर्देश
Thu, 16 Apr 2020 01:42 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 16 Apr 2020 01:42 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से पूछा है कि लॉक डाउन के दौरान वकीलों को हो रही परेशानी दूर करने के लिए क्या योजना बनाई है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि बार कौंसिल आफ इंडिया एक्ट की धारा 44 ए और 44 बी में दिए गए प्रावधानों के तहत उन्होंने अधिवक्ता कल्याण के लिए क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन से भी वकीलों की सहायता के लिए बनाई गई योजना अगली सुनवाई पर कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों से यह भी कहा है कि अगली सुनवाई पर उनके प्रतिनिधि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित हों।स्वत: प्रेरित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने दिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने बार काउंसिल आफ इंडिया और यूपी, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, अवध बार एसोसिएशन आदि को नोटिस जारी कर लॉक डाउन के दौरान वकीलों की परेशानी दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी थी।
बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जीएस परिहार और महासचिव शरद पाठक ही वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए, जबकि बार काउंसिल आफ इंडिया और यूपी, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश के पास वकीलों की सहायता करने के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है। बार कौंसिल आफ इंडिया एक्ट की धारा 44ए और 44 बी के तहत अधिवक्ता कल्याण समिति का गठन करने और एक कार्पस फंड बनाने का प्रावधान है, ताकि आपत्ति के समय वकीलों की मदद की जा सके। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, जो कि राज्य सरकार ने हस्तांतरित कर दी है।
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यूपी बार काउंसिल के वकील ने ई मेल के जरिए कोर्ट को बताया कि वकीलों की सहायता के लिए बार काउंसिल योजना बना रहा है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी बताया कि जिन वकीलों को पैसे की आवश्यकता है, उनकी मदद के प्रयास किए जा रहे हैं। अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एच जी परिहार का कहना था कि वकीलों की सहायता के लिए अस्थायी योजना बनाई गई है, मगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा एक निश्चित योजना बनाए जाने की आवश्यकता है। कानपुर के अधिवक्ता पवन कुमार तिवारी की याचिका के साथ इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों से यह भी कहा है कि अगली सुनवाई पर उनके प्रतिनिधि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित हों।स्वत: प्रेरित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने दिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने बार काउंसिल आफ इंडिया और यूपी, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, अवध बार एसोसिएशन आदि को नोटिस जारी कर लॉक डाउन के दौरान वकीलों की परेशानी दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी थी।
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बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जीएस परिहार और महासचिव शरद पाठक ही वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए, जबकि बार काउंसिल आफ इंडिया और यूपी, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश के पास वकीलों की सहायता करने के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है। बार कौंसिल आफ इंडिया एक्ट की धारा 44ए और 44 बी के तहत अधिवक्ता कल्याण समिति का गठन करने और एक कार्पस फंड बनाने का प्रावधान है, ताकि आपत्ति के समय वकीलों की मदद की जा सके। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, जो कि राज्य सरकार ने हस्तांतरित कर दी है।
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यूपी बार काउंसिल के वकील ने ई मेल के जरिए कोर्ट को बताया कि वकीलों की सहायता के लिए बार काउंसिल योजना बना रहा है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी बताया कि जिन वकीलों को पैसे की आवश्यकता है, उनकी मदद के प्रयास किए जा रहे हैं। अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एच जी परिहार का कहना था कि वकीलों की सहायता के लिए अस्थायी योजना बनाई गई है, मगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा एक निश्चित योजना बनाए जाने की आवश्यकता है। कानपुर के अधिवक्ता पवन कुमार तिवारी की याचिका के साथ इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।