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सेना के साथ फिर समाधान की ओर बढ़ी वार्ता, बन रही रणनीति
Wed, 06 Nov 2019 01:24 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2019 01:24 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
परेड मैदान में हुए निर्माण को लेकर सेना और प्रशासन के बीच विवाद खत्म होने के दावे किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि उच्च स्तरीय वार्ता में समाधान की दिशा तय हो गई है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि माघ मेला जिला प्रशासन कराएगा। हालांकि, उन्होंने फैसले के बिंदु पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
मेला प्रशासन कार्यालय में रखे दस्तावेज नमी की वजह से दीमक की भेंट चढ़ चुके हैं। इसमें मेला क्षेत्र को लेकर सेना और मेला प्रशासन के बीच हुए समझौते से संबंधित कागजात भी शामिल हैं। अब विवाद खड़ा होने के बाद प्रशासन ने सेना से संबंधित दस्तावेजों की मांग की है।
इससे प्रशासन के दावों को बल मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि मेला क्षेत्र में प्रशासन की ओर से कराए गए निर्माण, खासतौर पर आईसीसीसी सेना के लिए भी उपयोगी है। सेना भी इसकी मदद से परेड तथा आसपास के क्षेत्रों पर नजर रख सकती है। अफसरों का कहना है कि इसके अलावा कई अन्य बिंदु हैं जिन्हें लेकर सकारात्मक वार्ता हुई है।
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जल्द ही कोई निर्णय हो जाएगा। इससे इतर एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि मेला कार्यालय, आईसीसीसी और एसएसपी कार्यालय को सीज करने को लेकर सेना की ओर से कोई नोटिस नहीं आया है। ऐसे में वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। उनका कहना है कि माघ मेला की तैयारी शुरू कर दी गई है। उसका खाका तैयार कर लिया गया है। जल्द ही मेला क्षेत्र में भी काम शुरू होगा। उनका कहना है कि इस बार भी 2018 माघ मेला जैसी सुविधाएं होंगी।
मेला के विस्तार पर असमंजस, किसान भी दुविधा में
माघ मेला के लिए अभी तक क्षेत्र का निर्धारण नहीं हो पाया है। पहले बाढ़ की वजह से गंगा की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी तो अब बजट तथा सेना के साथ विवाद की वजह से असमंजस की स्थिति है। ऐसे में अभी तक तय नहीं हो सका है कि मेला का विस्तार कहां तक और किस तरफ होगा। इसकी वजह से सलोरी नागबासुकी के पास से होने वाली सब्जी आदि की खेती भी प्रभावित हो गई है। कहीं मेला क्षेत्र में जमीन न चली जाए इसलिए किसान खेती करने को लेकर दुविधा में हैं।
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मेला प्रशासन कार्यालय में रखे दस्तावेज नमी की वजह से दीमक की भेंट चढ़ चुके हैं। इसमें मेला क्षेत्र को लेकर सेना और मेला प्रशासन के बीच हुए समझौते से संबंधित कागजात भी शामिल हैं। अब विवाद खड़ा होने के बाद प्रशासन ने सेना से संबंधित दस्तावेजों की मांग की है।
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इससे प्रशासन के दावों को बल मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि मेला क्षेत्र में प्रशासन की ओर से कराए गए निर्माण, खासतौर पर आईसीसीसी सेना के लिए भी उपयोगी है। सेना भी इसकी मदद से परेड तथा आसपास के क्षेत्रों पर नजर रख सकती है। अफसरों का कहना है कि इसके अलावा कई अन्य बिंदु हैं जिन्हें लेकर सकारात्मक वार्ता हुई है।
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जल्द ही कोई निर्णय हो जाएगा। इससे इतर एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि मेला कार्यालय, आईसीसीसी और एसएसपी कार्यालय को सीज करने को लेकर सेना की ओर से कोई नोटिस नहीं आया है। ऐसे में वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। उनका कहना है कि माघ मेला की तैयारी शुरू कर दी गई है। उसका खाका तैयार कर लिया गया है। जल्द ही मेला क्षेत्र में भी काम शुरू होगा। उनका कहना है कि इस बार भी 2018 माघ मेला जैसी सुविधाएं होंगी।
मेला के विस्तार पर असमंजस, किसान भी दुविधा में
माघ मेला के लिए अभी तक क्षेत्र का निर्धारण नहीं हो पाया है। पहले बाढ़ की वजह से गंगा की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी तो अब बजट तथा सेना के साथ विवाद की वजह से असमंजस की स्थिति है। ऐसे में अभी तक तय नहीं हो सका है कि मेला का विस्तार कहां तक और किस तरफ होगा। इसकी वजह से सलोरी नागबासुकी के पास से होने वाली सब्जी आदि की खेती भी प्रभावित हो गई है। कहीं मेला क्षेत्र में जमीन न चली जाए इसलिए किसान खेती करने को लेकर दुविधा में हैं।