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बेंच विभाजन के विरोध में बार ने तेज की कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 10 Dec 2014 12:23 AM IST
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने के लिए वहां के वकीलों द्वारा किए जा रहे आंदोलन के विरोध में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी अपनी कवायद तेज कर दी है। बार का संकल्प है कि बेंच विभाजन किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।
मंगलवार को मामले पर हुई बैठक में कहा गया कि हाईकोर्ट का इलाहाबाद की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए यह सिर्फ वकीलों का ही नहीं बल्कि शहर के विकास को अवरुद्ध करने का मामला है। बार ने तय किया है कि 17 जनवरी को लाइब्र्रेरी हॉल में एक सभा बुलाई गई है जिसमें सभी राजनीतिक प्रतिनिधि, व्यापार मंडल, कर्मचारी संघों, छात्र संघ और अन्य सामाजिक संगठनों के लोगों को बुलाया जाएगा।
बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय और महासचिव सीपी उपाध्याय ने शहर वासियों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। मालूम हो कि हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाने के विरोध में हाईकोर्ट के अधिवक्ता कई बार लंबा आंदोलन कर चुके हैं। लंबी हड़ताल और धरना प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम इस मुद्दे पर होते रहे हैं। पिछले साल भी चुनाव से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकीलों द्वारा किए गए आंदोलन के विरोध में हाईकोर्ट के वकील 20 दिन से अधिक हड़ताल पर रहे।
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मंगलवार को मामले पर हुई बैठक में कहा गया कि हाईकोर्ट का इलाहाबाद की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए यह सिर्फ वकीलों का ही नहीं बल्कि शहर के विकास को अवरुद्ध करने का मामला है। बार ने तय किया है कि 17 जनवरी को लाइब्र्रेरी हॉल में एक सभा बुलाई गई है जिसमें सभी राजनीतिक प्रतिनिधि, व्यापार मंडल, कर्मचारी संघों, छात्र संघ और अन्य सामाजिक संगठनों के लोगों को बुलाया जाएगा।
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बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय और महासचिव सीपी उपाध्याय ने शहर वासियों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। मालूम हो कि हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाने के विरोध में हाईकोर्ट के अधिवक्ता कई बार लंबा आंदोलन कर चुके हैं। लंबी हड़ताल और धरना प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम इस मुद्दे पर होते रहे हैं। पिछले साल भी चुनाव से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकीलों द्वारा किए गए आंदोलन के विरोध में हाईकोर्ट के वकील 20 दिन से अधिक हड़ताल पर रहे।
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