फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   In just 15 years, ownership of billions

महज 15 साल में अरबों की मिल्कियत

Sat, 12 Sep 2015 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 12 Sep 2015 01:46 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। पंद्रह साल पहले मोपेड से घूमने वाले संजीव अग्रवाल के हजारों करोड़ रुपये तक की मिल्कियत बनाने का सफर किसी परी कथा से कम नहीं है। महज 15 साल में अरबों की संपत्ति बना लेना नामुमकिन सा लगता है लेकिन जमीन का धंधा ही ऐसा है कि सबको साथ लेकर चले तो करोड़ों का वारा-न्यारा होने में देर नहीं लगती। हालांकि जमीन के धंधे को अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है, सो संजीव के भी तमाम बड़े प्रोजेक्ट को लेकर कई बार सवाल उठे लेकिन अफसरों और नेताओं की भी उनपर कृपा रही। यहां तक कि आयकर विभाग ने भी अरबों की मिल्कियत के मालिक पर कभी नजर टेढ़ी नहीं की।
विज्ञापन


शहर के पॉश इलाकों सिविल लाइंस, अशोक नगर, जार्जटाउन आदि में नजूल के बड़े-बड़े प्लाट खरीदने और उस पर बहुमंजिला ग्रुपहाउसिंग, व्यावसायिक इमारतों का जाल बिछाने में बिल्डर संजीव अग्रवाल इलाहाबाद में अव्वल रहे। 100-100 वर्ग मीटर के नजूल प्लाटों को फ्रीहोल्ड कराने के लिए आम आदमी को भले ही 10-10 साल लग गए लेकिन नजूल की जिस जमीन पर बिल्डर की नजर पड़ी, उसे प्रशासनिक अफसरों की मेहरबानी से कभी 24 घंटे तो कभी हफ्ते भर मेेें ही फ्रीहोल्ड कर दिया गया। एडीए से बिना लेआउट प्लान स्वीकृत कराए सिविल लाइंस में नजूल के बंगलों में प्लाटिंग करा दी गई। यह भी एडीए अफसरों की मेहरबानी से हुआ।
विज्ञापन


डॉ.एके बंसल पर हमले के आरोपी बिल्डर संजीव अग्रवाल ने तकरीबन 15 साल पहले कंप्यूटर सेंटर बंद कर रियल एस्टेट के धंधे में हाथ डाला और आज वह इलाहाबाद के प्रमुख बिल्डरों में शुमार हैं। संजीव ने सिविल लाइंस में ताशकंद मार्ग, एलगिन रोड, कैंट में पोन्नपा रोड पर नजूल के कई बडे़-बड़े बंगलों में प्लाटिंग की। सबकुछ एडीए अफसराें की नाक के नीचे होता रहा और वे आंखें मूंदे बैठे रहे। इसके साथ सिविल लाइंस में बड़े-बड़े बंगले लेकर कई ग्रुप हाउसिंग और व्यावसायिक इमारतें खड़ी करने के साथ अशोक नगर, शिवराम दास गुलाटी मार्ग, जार्जटाउन आदि में भी ग्रुप हाउसिंग बनवाई। इन प्रोजेक्ट्स में कहीं कोई खामी मिली भी तो मामला जांच से आगे नहीं बढ़ सका। शहर के पॉश इलाकों में बनी बिल्डर की ऊंची-ऊंची ग्रुप हाउसिंग में फ्लैट 50 लाख रुपये से लेकर 1.50 करोड़ रुपये तक में बिके।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ.बंसल और बिल्डर संजीव के बीच जॉर्जटाउन की जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, वह भी करोड़ों रुपये की है। इस संजीव ने ग्यारह मंजिल का लग्जरी सिद्धेश्वरी अपार्टमेंट बनवा दिया। सिविल लाइंस में विनायक सिटी सेंटर मॉल तथा वशिष्ट विनायक सेंटर को भी लेकर विवाद रहा है। इन दोनों बिल्डिंगों के बीच से किसी समय बड़ा नाला गुजरता था, जिस पर कब्जा कर लिया गया। दो साल पहले तत्कालीन कमिश्नर बादल चटर्जी ने इन दोनों बिल्डिंगों से लेकर संगीत समिति तक जाने वाले नाले को चिह्ंित कराके लाल निशान भी लगवाया था लेकिन हुआ कुछ नहीं

सिविल लाइंस में सरदार पटेल मार्ग स्थित विनायक सिटी सेंटर मॉल का नक्शा जुलाई 2006 में तत्कालीन एडीए वीसी राजाराम उपाध्याय ने अपने रिटायरमेंट के पहले स्वीकृत किया था। सूत्रों के मुताबिक मॉल के नक्शे में कुछ खामियां थी सो फाइल एडीए में बेहद गोपनीय ढंग से चली। तत्कालीन वीसी उपाध्याय, जेडओ बैजनाथ के अलावा एक जेई और दो-तीन बाबूओं के इर्दगिर्द ही यह फाइल घूमती रही। आज भी यह फाइल किस बाबू के पास है, इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। मॉल के नक्शे पर उप विभाजन शुल्क कम लगाने की शिकायत शासन स्तर पर हुई थी। इसके बाद फाइल शासन में भी गई लेकिन नतीजा सिफर रहा और एडीए से नक्शा स्वीकृत हो गया। मॉल में पार्किंग, सेडबैक आदि को लेकर भी सवाल खड़े हुए लेकिन बाद में उसे भी विनियमित कर दिया गया।

बिल्डर संजीव अग्रवाल के हजारों करोड़ के साम्राज्य का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके पास 21 कंपनियां हैं। संजीव इसमें से 16 कंपनियों के डायरेक्टर, तीन कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर और दो कंपनी के डेजिग्नेटड पार्टनर हैं। वर्ष 2004 में प्रयाग बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से पहली कंपनी खोली। उसके बाद वर्ष 2006 से 2013 के बीच में तकरीबन हर वर्ष एक कंपनी खोली। बीच में 2010 के दिसंबर माह में तो आधा दर्जन कंपनियां खोल डालीं। सभी कंपनियां मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स (एमसीए) में रजिस्टर्ड भी हैं।

‘शहर के भीतर या बाहर कहीं भी अवैध प्लाटिंग हुई है या कराई जा रही है तो इसकी जांच कराई जा रही है। सिविल लाइंस में बड़े बंगलों में चोरी-छिपे प्लाटिंग करने वालों की भी जांच कराई जाएगी। अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ एके सिंह, वीसी एडीए


‘दो वर्ष पहले कमिश्नर रहते नगर निगम को सिविल लाइंस में पुराने नाले खोलने का आदेश दिया। ताशकंद मार्ग, सरदार पटेल मार्ग होकर एलगिन रोड और वहां से स्टेनली रोड होकर चंद्रशेखर आजाद पार्क तक नाले की जमीन पर कब्जा कर बड़ी व्यावसायिक इमारतें, भवन बन गए। आदेश पर निगम ने नाले की जमीन पर लाल निशान भी लगाए लेकिन इलाहाबाद से तबादला होने के बाद निगम ने कुछ नहीं किया। बाद में आए कमिश्नर और नगर आयुक्त भी इसे लेकर गंभीर नहीं है।’ बादल चटर्जी, पूर्व कमिश्नर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed