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IIIT : दीक्षांत समारोह में बोले प्रो. टीजी सीताराम-  रिस्क लें और असुविधा में सहज होना सीखें, आपके साथ देश भी

Sun, 14 Sep 2025 02:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 14 Sep 2025 02:50 PM IST
सार

रिस्क लेने की हिम्मत रखें, असुविधा में सहज होना सीखें, तभी आप भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदल पाएंगे और देश भी आगे बढ़ेगा। यह बात नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम ने शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के 20वें दीक्षांत समारोह में कही।

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IIIT Prof. TG Sitaram said in convocation ceremony- Take risks and learn comfortable with discomfort
ट्रिपल आईटी के दीक्षांत समारोह में बोलते प्रो. टी.जी. सीताराम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रिस्क लेने की हिम्मत रखें, असुविधा में सहज होना सीखें, तभी आप भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदल पाएंगे और देश भी आगे बढ़ेगा। यह बात नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम ने शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के 20वें दीक्षांत समारोह में कही। समारोह में 648 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही 22 मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। बीटेक छात्र शिखर अग्रवाल को इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल मिला।

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प्रो. सीताराम ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल नीतियों से संभव नहीं है बल्कि युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और संकल्प ही इसे वास्तविकता में बदलेगा। उन्होंने स्टार्टअप संस्कृति अपनाने और तकनीक को मानवता एवं प्रकृति की सेवा लगाने की अपील की। स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह केवल उत्पाद खरीदने तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषा और नवाचार पर गर्व करने का संकल्प है।
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ओपन एआई जिक्र करते हुए प्रो. सीताराम ने कहा कि इसकी मदद से भारत को नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना है। भारत में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को एआई के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। इसके लिए ओपन एआई के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता भारत के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एआई की शक्ति को सुलभ और उपयोगी बनाएगा।

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IIIT Prof. TG Sitaram said in convocation ceremony- Take risks and learn comfortable with discomfort
ट्रिपल आईटी के दीक्षांत समारोह में उपस्थित उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

निदेशक ने गिनाईं संस्थान की उपलब्धियां

निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि इस बार 440 स्नातक, 176 स्नातकोत्तर और 34 पीएचडी छात्रों ने डिग्री हासिल की। इनमें 150 छात्राएं हैं। 424 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है। 95 फीसदी से अधिक सफलता दर और 9.88 सीजीपीए संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है।

दीपक घैसास ने प्रेरक कहानियों से दिया संदेश

विशिष्ट अतिथि जेनकोवल स्ट्रेटेजिक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक घैसास ने संबोधन को तीन कहानियों से सजाया। शेर और जेबरा की कहानी से उन्होंने संदेश दिया कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। गधे और सियार की बहस वाली कहानी में उन्होंने कहा कि गलत और बेकार की बातों पर समय न गंवाएं। तैराकी सीखने के अनुभव पर आधारित तीसरी कहानी में उन्होंने बताया कि असुविधा में सहज होना ही असली सफलता है।

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ट्रिपल आईटी के दीक्षांत समारोह में उपस्थित उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

पूर्व छात्र कमलेश लाहोटी की तीन अहम सीख

मॉर्गन स्टैनले के उपाध्यक्ष व संस्थान के पूर्व छात्र कमलेश लाहोटी ने छात्रों को जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल उपलब्धियों का नहीं बल्कि साहस, धैर्य और महत्वाकांक्षा का सम्मान है। लाहोटी ने छात्रों को तीन बातें बताईं। पहली बदलाव को अपनाना व सुनियोजित जोखिम लेने का साहस रखना, दूसरी रिश्तों को महत्व देना व उन्हें जीवन की सबसे बड़ी पूंजी मानना और तीसरी अपने प्रभाव को कभी कम न आंकना।

प्रो. भीम सिंह ने दिलाई नई जिम्मेदारियों की याद

ट्रिपलआईटी के प्रो. भीम सिंह ने कहा कि यह दिन केवल सफलता का उत्सव नहीं है बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने स्नातकों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि मेहनत, समर्पण और धैर्य का परिणाम है।

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ट्रिपल आईटी के दीक्षांत समारोह में पदक विजेता छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं शिखर

इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल प्राप्त शिखर अग्रवाल (बीटेक-ईसीई) स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को दिया। शिखर का चयन एसएपी बंगलूरू में हुआ है। पिता आशीष अग्रवाल व्यवसायी और मां अंजू गृहिणी हैं।

इन मेधावियों को मिले पदक मेडल सहित दो स्वर्ण पदक

बीटेक (ईसीई) के छात्र शिखर अग्रवाल को उनके समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए संस्थान गोल्ड मेडल सहित दो स्वर्ण पदक मिले। वहीं, बीटेक आईटी के लिए अंजलि सिंह, ईशान ओबेरॉय व रितेश कुमार गुप्ता, बीटेक (ईसीई) के लिए शिखर अग्रवाल, शुभांकित पांडे व प्रखर जैन, एमबीए के लिए प्रणय पांडे, स्नेहा अंबष्ठ व सत्यम त्रिपाठी, एमटेक आईटी के लिए आकृति सिंह, अनन्या गुप्ता व ऋषभ भारद्वाज, एमटेक (ईसीई) के लिए आयुष मौर्य, ऋषित कनौजिया व विशाल चौधरी को क्रमशः स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक और प्रकृति वशिष्ठ, ईशान ओबेरॉय, सुकांक्षी शर्मा, सना तरन्नुम और जय मोरयानी को एंडोमेंट पदक प्रदान किए गए।

उत्साह और गर्व से भरा समारोह

समारोह में छात्रों के साथ अभिभावक भी मौजूद रहे और सभी ने गर्व महसूस किया। वातावरण में उत्साह और उमंग झलक रही थी। मुख्य अतिथियों ने छात्रों को समाज और देश निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दी। प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि संस्थान की असली पहचान उसके छात्र हैं और वे जिस तरह अपने ज्ञान व कौशल से राष्ट्र को आगे बढ़ाएंगे, वही संस्थान की वास्तविक उपलब्धि होगी।

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