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Research : पित्त की थैली में पथरी हाेने पर कैंसर की जांच जरूरी, रेडियोथेरपी विभाग में हुआ शोध

Thu, 18 Jul 2024 06:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 18 Jul 2024 06:17 PM IST
सार

सात महीने के शोध में पाया गया कि अगर पित्त की थैली में पथरी, लीवर में इन्फेक्शन और टाइफाइड है, तो कैंसर की जांच आवश्यक हो जाती है। वहीं, अगर बायोप्सी जांच में मरीज में गॉल ब्लैडर का कैंसर पाया जाता है, तो बिना देरी इलाज शुरू किया जाना चाहिए।

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If there are stones in the gallbladder, cancer testing is necessary, research was done in the radiotherapy dep
health - फोटो : istock

विस्तार

पित्त की थैली में कैंसर का पता काफी देर में चलता है। इस वजह से मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। इसके शुरुआती दौर में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कैंसर रेडियोथेरेपी विभाग में एक शोध किया गया।

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सात महीने के शोध में पाया गया कि अगर पित्त की थैली में पथरी, लीवर में इन्फेक्शन और टाइफाइड है, तो कैंसर की जांच आवश्यक हो जाती है। वहीं, अगर बायोप्सी जांच में मरीज में गॉल ब्लैडर का कैंसर पाया जाता है, तो बिना देरी इलाज शुरू किया जाना चाहिए।
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रेडियोथेरेपी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देव कुमार यादव ने शोध में 40 से 50 वर्ष की उम्र के 25 गॉल ब्लैडर के कैंसर के मरीजों को शामिल किया। इनमें 18 महिलाएं और नौ पुरुष थे। इस दौरान सभी मरीजों के इतिहास को जाना गया और अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराया गया। इनमें से 80 फीसदी मरीजों को टायफाइड की शिकायत मिली। इसके अलावा अन्य मरीजों को पित्त की थैली में पथरी व लीवर इन्फेक्शन की समस्या पाई गई।
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एक जनवरी 2023 से जुलाई 2023 तक चले शोध में पाया गया कि अगर किसी मरीज की आंत या पेट का इन्फेक्शन है। गॉल ब्लैडर में पथरी है, या टायफायड है, तो मरीज के बायोप्सी और इन्फेक्शन के कल्चर की जांच जरूर करा लें। ऐसे में अगर कैंसर की समस्या सामने आती है, तो मरीज का इलाज समय रहते किया जा सकता है। यह शोध दिसंबर 2023 में इंडियन जनरल ऑफ अप्लाइड रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।

बीएचयू और एम्स में भी हो चुका है शोध

वाराणसी के बीएचयू मेडिकल कॉलेज व दिल्ली के एम्स अस्पताल में भी इसी विषय पर शोध हो चुका है। जिसमें गॉल ब्लैडर के कैंसर के संबंध में समय पर जानकारी होने के लिए पित्त की थैली में पथरी, लीवर इन्फेक्शन व टाइफाइड होने की दशा में मरीज के बायोप्सी और इन्फेक्शन के कल्चर की जांच होना जरूरी माना गया।

समय रहते पता नहीं चलता कैंसर

गॉल ब्लैडर का कैंसर शुरुआती दौर में पता नहीं चलता है, क्योंकि इस दौरान मरीज को कोई समस्या नहीं होती है। जब मरीज को भीषण पेट दर्द या फिर अन्य दिक्कत होती है, तब जांच में कैंसर की बात सामने आती है। तब तक मरीज का कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। ऐसे में मरीज को बचा पाना मुश्किल होता है।

गंगा किनारे के इलाकों में गॉल ब्लैडर के कैंसर की समस्या अधिक देखने को मिलती है। यह महिलाओं में अधिक होता है। समय रहते कैंसर का पता चले, इसके लिए बायोप्सी और इन्फेक्शन के कल्चर की जांच होना जरूरी है। - डॉ. देव कुमार यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडियोथेरेपी एवं कैंसर विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

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