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High Court : न्यायिक आदेश को उच्च अदालत ने स्थगित नहीं किया तो उसका पालन अनिवार्य

Thu, 12 Mar 2026 04:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Mar 2026 04:04 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत की ओर से पारित न्यायिक आदेश को उच्च अदालत ने स्थगित नहीं किया तो उसका पालन अनिवार्य है।

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If the High Court does not stay the judicial order, its compliance is mandatory
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत की ओर से पारित न्यायिक आदेश को उच्च अदालत ने स्थगित नहीं किया तो उसका पालन अनिवार्य है। यदि राज्य आदेशों का पालन नहीं करता है तो उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे में राज्य के अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जाना चाहिए।

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कोर्ट ने सिविल कोर्ट मऊ के यथास्थिति बनाए रखने व अदालत के अवमानना नोटिस के बावजूद आदेश की अवहेलना जारी रखने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने एसडीएम मधुबन राजेश अग्रवाल को 13 मार्च 2026 को तलब किया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि हाजिर नहीं होते हैं तो गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार को याची की जमीन पर सड़क निर्माण रोकने का भी आदेश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आशा त्रिपाठी की याचिका पर दिया है। याची ने जमीन विवाद को लेकर विपक्षियों के खिलाफ सिविल वाद दायर किया था। सिविल कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बाद भी सरकार ने याची की जमीन पर सड़क का निर्माण जारी रखा। याची ने सिविल कोर्ट में अवमानना अर्जी दायर की, जिस पर कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है। इसके बाद भी निर्माण जारी रहा। तब याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सड़क निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारी अदालत के आदेश का उल्लघंन कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों को दंडित करना चाहिए। कोर्ट ने एसडीएम को तलब किया है। 

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एडीएम के गुंडा नियंत्रण कानून के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडीएम वित्त एवं राजस्व आजमगढ़ की ओर से गुंडा नियंत्रण कानून के तहत जारी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। साथ ही याची को कारण बताओ नोटिस का जवाब सक्षम अधिकारी के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने बीरेंद्र बहादुर यादव की ओर से दायर याचिका पर दिया। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि एडीएम ने आवश्यक तथ्यों पर विवेक का इस्तेमाल किए बिना मनमाने ढंग से नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आंचल यादव प्रकरण में दिए गए फैसले के विपरीत की गई है। इसलिए गुंडा एक्ट के तहत जारी नोटिस को रद्द किया जाए। 

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