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मेजा में आईएएस अफसर के घर पहुंची सीबीआई
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 25 Sep 2015 12:32 AM IST
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मेजा (इलाहाबाद)। मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम बृहस्पतिवार को आईएएस अफसर ओमप्रकाश शुक्ला के मेजा में सोनाई स्थित पैतृक निवास पहुंची। ओमप्रकाश शुक्ला एमपी के तत्कालीन शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत के ओएसडी थे। सीबीआई टीम ने घर पर छानबीन के बाद गांववालों से उनकी संपत्तियों के बारे में पूछताछ की। इस जांच के दौरान स्थानीय पुलिस को सूचना भी नहीं दी गई।
मेजा में सोनाई गांव निवासी ओमप्रकाश शुक्ला मध्य प्रदेश में पीसीएस अफसर थे। गांव वालों से पता चला कि बाद में प्रोन्नति पाकर वह आईएएस हो गए। मध्य प्रदेश में व्यापम (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले के वक्त वह तत्कालीन शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत के ओएसडी थे। घोटाला उजागर होने पर गिरफ्तारियां हुईं और मंत्री के साथ उनके ओएसडी ओमप्रकाश को भी जेल भेज दिया गया। ओमप्रकाश के एक भाई डॉक्टर हैं।
यहां सोनाई गांव में उनके पिता आशाराम शुक्ला परिवार के कुछ लोगों के साथ रहते हैं। बृहस्पतिवार दोपहर सीबीआई की टीम उनके घर पहुंची और पिता आशाराम से कुछ पूछताछ की। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश का घर आना-जाना बेहद कम था। पिता से बातचीत और घर में कुछ मिनट छानबीन के बाद सीबीआई अफसरों ने पास के बगीचे में जाकर गांव वालों से भी पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि ओमप्रकाश के यहां कितने खेत और मकान हैं। शहर में कितनी संपत्ति है। मगर ग्रामीणों ने सीबीआई टीम से कहा कि ओमप्रकाश ने गांव में संपत्ति नहीं बनाई। वह पैतृक मकान पर ध्यान भी नहीं देते थे। करीब 15 मिनट तक बातचीत के जरिए जानकारी लेने के बाद सीबीआई टीम लौट गई। ग्रामीणों के मुताबिक, अफसरों ने खुद बताया कि वे सीबीआई के हैं।
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मेजा में सोनाई गांव निवासी ओमप्रकाश शुक्ला मध्य प्रदेश में पीसीएस अफसर थे। गांव वालों से पता चला कि बाद में प्रोन्नति पाकर वह आईएएस हो गए। मध्य प्रदेश में व्यापम (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले के वक्त वह तत्कालीन शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत के ओएसडी थे। घोटाला उजागर होने पर गिरफ्तारियां हुईं और मंत्री के साथ उनके ओएसडी ओमप्रकाश को भी जेल भेज दिया गया। ओमप्रकाश के एक भाई डॉक्टर हैं।
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यहां सोनाई गांव में उनके पिता आशाराम शुक्ला परिवार के कुछ लोगों के साथ रहते हैं। बृहस्पतिवार दोपहर सीबीआई की टीम उनके घर पहुंची और पिता आशाराम से कुछ पूछताछ की। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश का घर आना-जाना बेहद कम था। पिता से बातचीत और घर में कुछ मिनट छानबीन के बाद सीबीआई अफसरों ने पास के बगीचे में जाकर गांव वालों से भी पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि ओमप्रकाश के यहां कितने खेत और मकान हैं। शहर में कितनी संपत्ति है। मगर ग्रामीणों ने सीबीआई टीम से कहा कि ओमप्रकाश ने गांव में संपत्ति नहीं बनाई। वह पैतृक मकान पर ध्यान भी नहीं देते थे। करीब 15 मिनट तक बातचीत के जरिए जानकारी लेने के बाद सीबीआई टीम लौट गई। ग्रामीणों के मुताबिक, अफसरों ने खुद बताया कि वे सीबीआई के हैं।
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