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मैं ठीक हूं, अपना और परिवार का ख्याल रखना, कानपुर में शहीद हुए दरोगा के थे अंतिम शब्द
Sat, 04 Jul 2020 01:10 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 04 Jul 2020 01:10 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
मैं ठीक हूं, अपना व परिवारवालों का ख्याल रखना। कोशिश कर रहा हूं, छुट्टी मिली तो जल्द घर आऊंगा।’ कानपुर देहात में बदमाशों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हंडिया के सपूत एसआई नेब्बूलाल ने घटना से कुछ देर पहले फोन यह बातें अपने बेटे अरविंद से कही थीं। शुक्रवार को उनकी शहादत की खबर पहुंची तो परिवारवाले बार-बार इन्हीं बातों को याद कर बिलखते रहे। उधर, बेटे की शहादत पर ग्रामीणों की भी आंखें नम रहीं।
कानपुर देहात में बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए जवानों में हंडिया के सपूत एसआई नेब्बूलाल भी शामिल हैं। बेटे की शहादत की खबर पहुंची तो परिवारवालों में कोहराम मच गया। उधर जानकारी पर ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं।
नेब्बूलाल बिंद (50) हंडिया के भीटी गंाव के रहने वाले थे। वह चार भाइयों में सबसे बड़े थे। एक भाई जयप्रकाश हंडिया थाने में होमगार्ड जबकि दूसरा भाई ओमप्रकाश वाराणसी में सिपाही है। छोटा भाई विजय प्रकाश घर पर रहकर खेती करता है।
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नेब्बूलाल 1999 में सिपाही के पद पर पुलिस विभाग में नियुक्त हुए। वर्ष 2006 में विभागीय परीक्षा पास करके वह मिर्जापुर जनपद से दरोगा के पद पर तैनात हुए। मृतक दरोगा के दो बेटे व दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सुनीता की शादी हो चुकी है। बेटा अरविंद कुमार कानपुर शहर में ही रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
बेटी मधुबाला तथा छोटा बेटा हिमंाशु घर पर ही मां श्यामा देवी व अन्य परिजनों के साथ रहकर पढ़ाई करते हैं। शुक्रवार को उनके शहीद होने की खबर मिली कोहराम मच गया तथा गंाव में मातम छा गया। घटना की जानकारी मिलते ही गंाव व बस्ती के लोग घर पहुंच गए तथा दरोगा के सरल स्वभाव और उनके बहादुरी की चर्चा करने लगे।
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कानपुर देहात में बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए जवानों में हंडिया के सपूत एसआई नेब्बूलाल भी शामिल हैं। बेटे की शहादत की खबर पहुंची तो परिवारवालों में कोहराम मच गया। उधर जानकारी पर ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं।
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नेब्बूलाल बिंद (50) हंडिया के भीटी गंाव के रहने वाले थे। वह चार भाइयों में सबसे बड़े थे। एक भाई जयप्रकाश हंडिया थाने में होमगार्ड जबकि दूसरा भाई ओमप्रकाश वाराणसी में सिपाही है। छोटा भाई विजय प्रकाश घर पर रहकर खेती करता है।
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नेब्बूलाल 1999 में सिपाही के पद पर पुलिस विभाग में नियुक्त हुए। वर्ष 2006 में विभागीय परीक्षा पास करके वह मिर्जापुर जनपद से दरोगा के पद पर तैनात हुए। मृतक दरोगा के दो बेटे व दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सुनीता की शादी हो चुकी है। बेटा अरविंद कुमार कानपुर शहर में ही रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
बेटी मधुबाला तथा छोटा बेटा हिमंाशु घर पर ही मां श्यामा देवी व अन्य परिजनों के साथ रहकर पढ़ाई करते हैं। शुक्रवार को उनके शहीद होने की खबर मिली कोहराम मच गया तथा गंाव में मातम छा गया। घटना की जानकारी मिलते ही गंाव व बस्ती के लोग घर पहुंच गए तथा दरोगा के सरल स्वभाव और उनके बहादुरी की चर्चा करने लगे।