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High Court : आय का विवरण छिपाने पर पति को नहीं मिली राहत, गुजारा-भत्ता देने का आदेश बरकरार

Wed, 21 Jan 2026 04:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 21 Jan 2026 04:44 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति भरण-पोषण के मामले में अपनी आय और संपत्ति का हलफनामा दाखिल करने में विफल रहता है तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है।

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Husband did not get relief for concealing income details, order to pay maintenance upheld
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति भरण-पोषण के मामले में अपनी आय और संपत्ति का हलफनामा दाखिल करने में विफल रहता है तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति गरिमा प्रशांत की एकल पीठ ने परिवार न्यायालय की ओर से पत्नी के पक्ष में दिए गए गुजारा-भत्ता के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।

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पीलीभीत निवासी श्याम लाल की पत्नी ने परिवार न्यायालय में गुजारा-भत्ता की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। 14 जून 2020 को उनका विवाह श्याम लाल के साथ हुआ था। आरोप लगाया कि दहेज की मांग के कारण उन्हें 14 मार्च 2022 को ससुराल से निकाल दिया गया था। तब से वह माता-पिता के साथ रह रही हैं। उन्हें कोई भरण-पोषण नहीं दिया जा रहा था।
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उन्होंने पढ़ाई और दैनिक खर्चों के लिए 15,000 रुपये प्रति माह और मुकदमे के लिए 2,000 रुपये प्रति माह की मांग की थी। हालांकि, परिवार न्यायालय ने 12 अगस्त 2024 को पति को 3,500 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इस फैसले को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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पति के वकील ने दलील दी कि पत्नी एमए और एलएलबी की पढ़ाई है। वह शिक्षित महिला हैं। अपनी आजीविका चलाने में सक्षम हैं। कोर्ट ने कहा कि पति यह साबित करने में विफल रहा कि पत्नी के पास आय का कोई स्रोत है या वह किसी लाभकारी रोजगार में लगी है। इसी के साथ कोर्ट ने 3,500 रुपये की राशि को उचित माना और कहा कि यह किसी भी तरह से अत्यधिक नहीं है। 

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