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प्रभावशाली अनुभाग अधिकारियों पर कसा शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:48 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई टीम ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में तैनात रहे प्रभावशाली अनुभाग अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू का दिया है। परीक्षाओं को प्रभावित किए जाने के सुराग मिलने के बाद सीबीआई की टीम अब सख्ती से पूछताछ कर रही है। इनके साथ ही कुछ अनु सचिव स्तर के अफसर भी सीबीआई के निशाने पर हैं।
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 34 अनुभाग अधिकारी, आठ अनु सचिव, छह उप सचिव, एक संयुक्त सचिव, एक परीक्षा नियंत्रक और एक सचिव तैनात हैं। आयोग के कर्मचारी यूडीए से प्रमोशन पाकर अनुभाग अधिकारी बनते हैं और इसके बाद प्रमोशन के जरिये उन्हें अनु सचिव बनाया जाता है। वहीं, अप सचिव के पद पर पीसीएस अफसर आते हैं। संयुक्त सचिव पर एडीएम स्तर के अफसरों और परीक्षा नियंत्रक के पद पर सीनियर पीसीएस की तैनाती की जाती है जबकि सचिव के पद पर आईएएस अफसर की तैनाती होती है। सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में इनमें से 14 अनुभाग अधिकारियों को परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं थी जबकि अन्य अनुभाग अधिकारियों को पैदल कर दिया गया था।
सूत्रों का कहना है कि जो अनुभाग अधिकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के भागीदार नहीं बने, उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। सीबीआई ने जब इन 14 अनुभाग अधिकारियों की कुंडली निकाली और जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सीबीआई अब इसी आधार पर इनसे पूछताछ कर रही है। सभी 14 अनुभाग अधिकारी सीबीआई के निशाने पर हैं और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सीबीआई को यह शिकायत भी मिली थी कि अनिल यादव के कार्यकाल में एक सीनियर अफसर के रहते जूनियर अफसर को उनसे ऊंचे पद पर इसलिए बैठा दिया गया, क्योंकि सीनियर अफसर उस वक्त आयोग में चल रही गड़बड़ियों में भागीदारी नहीं बना। ऐसे ही कई और मामले भी सामने आए हैं। सीबीआई की टीम ने शिकायतों की जांच-पड़ताल के बाद संदिग्ध अफसरों की सूची तैयार की है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
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सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 34 अनुभाग अधिकारी, आठ अनु सचिव, छह उप सचिव, एक संयुक्त सचिव, एक परीक्षा नियंत्रक और एक सचिव तैनात हैं। आयोग के कर्मचारी यूडीए से प्रमोशन पाकर अनुभाग अधिकारी बनते हैं और इसके बाद प्रमोशन के जरिये उन्हें अनु सचिव बनाया जाता है। वहीं, अप सचिव के पद पर पीसीएस अफसर आते हैं। संयुक्त सचिव पर एडीएम स्तर के अफसरों और परीक्षा नियंत्रक के पद पर सीनियर पीसीएस की तैनाती की जाती है जबकि सचिव के पद पर आईएएस अफसर की तैनाती होती है। सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में इनमें से 14 अनुभाग अधिकारियों को परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं थी जबकि अन्य अनुभाग अधिकारियों को पैदल कर दिया गया था।
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सूत्रों का कहना है कि जो अनुभाग अधिकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के भागीदार नहीं बने, उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। सीबीआई ने जब इन 14 अनुभाग अधिकारियों की कुंडली निकाली और जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सीबीआई अब इसी आधार पर इनसे पूछताछ कर रही है। सभी 14 अनुभाग अधिकारी सीबीआई के निशाने पर हैं और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सीबीआई को यह शिकायत भी मिली थी कि अनिल यादव के कार्यकाल में एक सीनियर अफसर के रहते जूनियर अफसर को उनसे ऊंचे पद पर इसलिए बैठा दिया गया, क्योंकि सीनियर अफसर उस वक्त आयोग में चल रही गड़बड़ियों में भागीदारी नहीं बना। ऐसे ही कई और मामले भी सामने आए हैं। सीबीआई की टीम ने शिकायतों की जांच-पड़ताल के बाद संदिग्ध अफसरों की सूची तैयार की है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
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