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Prayagraj : हिंदी-उर्दू के बीच की दूरी कम करती आ रही हिंदुस्तानी एकेडेमी

Sat, 29 Mar 2025 12:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Mar 2025 12:04 PM IST
सार

एकेडेमी से जुड़े रहे हिंदी रचनाकारों में श्यामसुंदर दास, हरिऔध, प्रेमचंद, धीरेंद्र वर्मा, श्रीधर पाठक, जगन्नाथ दास रत्नाकर, लाला सीताराम, मैथिलीशरण गुप्त, रामचंद्र शुक्ल, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, रामकुमार वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, माता प्रसाद गुप्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, उदय नारायण तिवारी आदि कुछ प्रमुख नाम हैं।

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Hindustani Academy is reducing the distance between Hindi and Urdu
रविनंदन सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अपने 98वें वर्ष में प्रवेश करने वाली हिंदुस्तानी एकेडेमी एक स्वायत्त सोसाइटी है, जो सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसके ही संरक्षण में कार्य करती है। एकेडेमी के वार्षिक सम्मेलनों का सबसे बड़ा योगदान है कि इससे हिंदी-उर्दू के बीच आपसी समझदारी विकसित होती रही, दोनों भाषाएं एक दूसरे को प्रेरित करती रहीं और एक दूसरे से प्रभाव ग्रहण करती रहीं। इन सम्मेलनों ने दोनों भाषाओं के बीच की दूरी को कम करने की कोशिश की। एकेडेमी का उद्देश्य हिंदी-उर्दू व लोक भाषाओं के साहित्य का संवर्धन और विकास करना है।

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हिंदुस्तानी त्रैमासिक पत्रिका 1931 से 1948 तक और दोबारा 1958 से आज तक प्रकाशित हो रही है। हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में इसका ऐतिहासिक महत्व है। इसके संपादकों में रामचंद्र टंडन, ताराचंद, धीरेंद्र वर्मा, माताप्रसाद गुप्त, हरदेव बाहरी, ब्रजेश्वर वर्मा, रामकुमार वर्मा और जगदीश गुप्त का प्रमुख योगदान रहा है। एक समय था जब हिंदी साहित्य जगत का हर बड़ा साहित्यकार किसी न किसी रूप में एकेडेमी से जुड़ा रहता था। अनेक ख्याति प्राप्त रचनाकार एकेडेमी की कार्य परिषद के सदस्य रहे।

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एकेडेमी से जुड़े रहे हिंदी रचनाकारों में श्यामसुंदर दास, हरिऔध, प्रेमचंद, धीरेंद्र वर्मा, श्रीधर पाठक, जगन्नाथ दास रत्नाकर, लाला सीताराम, मैथिलीशरण गुप्त, रामचंद्र शुक्ल, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, रामकुमार वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, माताप्रसाद गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, उदयनारायण तिवारी आदि कुछ प्रमुख नाम हैं।

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वहीं, उर्दू के विद्वान-रचनाकार जामिन अली, मसूद हसन रिजवी, दयानारायण निगम, मनोहरलाल जुत्शी, सज्जाद हैदर, मेहंदी हसन नासिरी, मौलवी अब्दुल माजिद दरियाबादी, मोहम्मद नईमुर्रहमान, हसरत मोहानी, रशीद अहमद, रामबाबू सक्सेना, एहतेशाम हुसैन आदि ने भी एकेडेमी से जुड़कर इसके लिए उल्लेखनीय कार्य किया। हिंदुस्तानी एकेडेमी के भविष्य के प्रति मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ। बड़ी दृष्टि वाले लोग जरूर आएंगे और हिन्दुस्तानी एकेडेमी की कसौटियों को ऊपर उठाते हुए अपनी भूमिका का निर्वाह करेंगे।  - रविनंदन सिंह, संपादक, सरस्वती पत्रिका)

 



 

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