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विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के खिलाफ याचिकाएं खारिज
Thu, 23 May 2019 12:49 AM IST
विनोद सिंह
Prayagraj
Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 23 May 2019 12:49 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल कई याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर हस्तक्षेप से इंकार करते हुए कहा कि याचीगण के पास वैकल्पिक उपचार उपलब्ध है। कारमाइकल लाइब्रेरी एसोसिएशन ज्ञानव्यापी की ओर से कॉरिडोर प्रोजेक्ट को चुनौती दी गई थी। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की।
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याचीगण का कहना था कि कारमाइकल लाइब्रेरी में उनकी वर्षों पुरानी 26 दुकानें हैं और उनको बिना कोई नोटिस दिए बेदखल किया जा रहा है। भवन का ध्वस्तीकरण किया जाना है। कहा गया कि ध्वस्तीकरण से याचीगण का रोजगार छिन जाएगा। इसलिए इसे रोका जाए और याचीगण का पुनर्वास किया जाए। विश्वनाथ मंदिर के अधिवक्ता विनीत संकल्प का कहना था कि कॉरिडोर के लिए इस भवन को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने 15 फरवरी 2019 को खरीद लिया है। अब यह राज्य सरकार की संपत्ति है।
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याचिका पोषणीय नहीं है क्योंकि याचीगण का मामला किरायेदारी के विवाद का है। इसमें यह तय करना होगा कि याचीगण वास्तव में किरायेदार हैं या नहीं और वह कब्जे में हैं या नहीं। इस विवाद का निपटारा याचिका में नहीं हो सकता है। याचीगण के पास सिविल सूट में जाने का विकल्प मौजूद है। कोर्ट ने वैकल्पिक उपचार उपलब्ध होने के आधार पर याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
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