फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High tradition of the High Court all applauded

हाईकोर्ट की उच्च परंपराओं को सभी ने सराहा

Mon, 03 Apr 2017 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 03 Apr 2017 01:29 AM IST
विज्ञापन
High tradition of the High Court all applauded
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
हाईकोर्ट की स्थापना के 150वें समारोह के समापन मौके  पर प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से लेकर सभी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की उच्च न्यायिक परंपरा, इसके फैसलों और न्याय प्रशासन के क्षेत्र में दिए गए योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हाईकोर्ट के डेढ़ सौवें स्थापना वर्ष का समापन समारोह नए भारत के सपने को पूरा करने की ताकत बन सकता है। यह विश्व न्याय का तीर्थ है।
विज्ञापन


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया खेहर ने इसके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट संगम पर स्थित है। देश में दूसरा कोई न्यायालय ऐसा नहीं है। यह कुंभ मेला और स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र भी रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमेशा उच्च परंपराओं और संस्कृति का पालन किया है। कहा कि इसी न्यायालय ने सूर्यनाथ सिंह बनाम भारत सरकार के केस में 1950 के जमींदारी उन्मूलन का कानून पारित करने में मदद की। 28 जजों की पीठ ने राममनोहर लोहिया को सजा देने पर रोक लगाई। देश को पहला भारतीय जज और पहला मुख्य न्यायाधीश देने वाला यही कोर्ट है। सर सुंदर लाल, मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तम दास टंडन, जगदीश स्वरूप, एसएन कक्कड़ , कन्हैया लाल मिश्र और एसपी गुप्ता जैसे वकील इसी उच्च न्यायालय की देन हैं। भारत को पांच मुख्य न्यायाधीश और 20 न्यायाधीश सुप्रीमकोर्ट को दिए।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट देश का सबसे बड़ा हाईकोर्ट है। यह देश की कुल आबादी के छठवें हिस्से को न्याय प्रदान करता है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की 150 वर्षों की यात्रा आधुनिक भारत की यात्रा है। यहां के वकीलों ने देश की आजादी के आंदोलन को हवा दी। इस हाईकोर्ट के फैसले मील का पत्थर साबित हुए हैं। बताया कि विधवा को ससुराल वालों से भरणपोषण पर 1901 में हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया था। उस मुकदमे की बहस पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। कानून मंत्री इंदिरागांधी केस और रामजन्म भूमि के फैसले का भी उल्लेख किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमेशा उच्च परंपराओं का पालन किया है। पांच जजों से शुरू हुए इस न्यायालय में आज जजों की क्षमता 160 है। साढ़े नौ लाख के करीब मुकदमे यहां लंबित हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आधुनिकीकरण की दिशा मेें भी कदम बढ़ाया है। देश का पहला डिजिटाजेशन सेंटर यहीं स्थापित किया गया है। पूरे परिसर को वाई फाई सुविधा से जोड़ा गया है। वकीलों को मुकदमों की जानकारी मोबाइल फोन पर दी जा रही है। जल्दी ही एडवोकेट डायरी के  नाम से नया एप्लीकेशन लांच किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed